भारत की स्वदेशी सैन्य क्षमताओं को सशक्त करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने गुरुवार को सतह से सतह पर प्रहार करने में सक्षम ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधिकारिक तौर पर इस उपलब्धि की पुष्टि की।
रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि ओडिशा तट के निकट गुरुवार को सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर प्रलय मिसाइल की प्रायोगिक उड़ान आयोजित की गई थी। यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के हिस्से के तौर पर संचालित किया गया, जिसमें मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूरी सटीकता के साथ पूरा किया। विभिन्न ट्रैकिंग व रेंज उपकरणों से जुटाए गए डेटा से इस उड़ान की सफलता प्रमाणित हुई है।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि यह परीक्षण देश के घरेलू रक्षा विनिर्माण और तकनीक को मजबूती देने की दिशा में एक अहम पड़ाव है। इससे ठीक पहले पिछले माह डीआरडीओ ने हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम का भी सफल परीक्षण किया था, जिसने समताप मंडल में 21 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर अपनी टिकाऊ उड़ान क्षमता का परिचय दिया था।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उक्त उड़ान के दौरान प्लेटफॉर्म ने पहले 21 किलोमीटर की औसत ऊंचाई हासिल की और फिर 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक सक्रिय रहकर उड़ान भरी। इसके उपरांत उसे सुरक्षित रूप से भूमि पर उतारा गया और परीक्षण के तमाम तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
यह परीक्षण दर्शाता है कि यह प्लेटफॉर्म समताप मंडल जैसे जटिल क्षेत्र में निगरानी और संचार संबंधी महत्वपूर्ण अभियानों को प्रभावी रूप से अंजाम दे सकता है। मिशन के दौरान विमान के संचालन और लाइव वीडियो से संबंधित आंकड़े निरंतर ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को प्राप्त होते रहे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म में लगे इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, ऑनबोर्ड कैमरे, जीपीएस और ऊंचाई नियंत्रक उपकरणों ने योजना के अनुसार काम किया। इस सफल अभियान में भारतीय वायुसेना, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दिनेस एंड सर्टिफिकेशन सहित कई नागरिक एजेंसियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।