प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना का दायरा बढ़ा: न्यूनतम आयु सीमा खत्म, 27 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिलेगी बढ़ी हुई राशि

प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना का दायरा बढ़ा: न्यूनतम आयु सीमा खत्म, 27 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिलेगी बढ़ी हुई राशि

नई दिल्ली में गुरुवार को एशियाई पैरा खेलों के एथलीटों के साथ संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु केंद्र सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने रेखांकित किया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के हालिया निर्णय के तहत अब दिव्यांग बच्चों को आर्थिक सहायता पाने के लिए वयस्क होने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे जन्म से ही इसके पात्र माने जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि पेंशन पाने के लिए तय न्यूनतम दिव्यांगता स्तर को 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले व्यवस्था यह थी कि आवेदक के 18 वर्ष का होने पर ही पेंशन प्रक्रिया आगे बढ़ती थी, किंतु नए प्रावधानों ने इस कानूनी बाध्यता को खत्म कर जन्म से ही योग्य बच्चों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में ला दिया है। इसके साथ ही योजना में मिलने वाली सहायता राशि को भी बढ़ाया गया है।

विगत माह लागू किए गए इन नियमों के चलते प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना के अंतर्गत मिलने वाली केंद्रीय सहायता को दो आयु वर्गों में पुनर्गठित किया गया है। 79 वर्ष तक की आयु वाले पात्र दिव्यांगजनों को प्रति माह 375 रुपये दिए जाएंगे, जबकि 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ दिव्यांगों के लिए यह दर 625 रुपये प्रति माह निर्धारित की गई है। नियमों में आई इस शिथिलता और राशि में वृद्धि के परिणामस्वरूप कुल लाभार्थियों की तादाद 8.33 लाख से उछलकर 27.48 लाख पर पहुंच गई है।

शासकीय जानकारी के अनुसार, इस पुनर्गठन का सीधा फायदा तीन वर्गों को मिल रहा है। सर्वप्रथम, गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले 40 से 79 प्रतिशत तक प्रमाणित दिव्यांग नागरिक इसका लाभ उठा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, निर्धन परिवारों के वे बच्चे जिनके पास आवश्यक दिव्यांगता प्रमाण पत्र है, वे आरंभ से ही पेंशन के हकदार होंगे, जिससे उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। अंततः, जो हितग्राही पहले से यह पेंशन प्राप्त कर रहे थे, उन्हें भी अब बढ़ी हुई दरों (375 रुपये अथवा 625 रुपये) के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

जनसांख्यिकीय परिप्रेक्ष्य में, 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में दिव्यांग व्यक्तियों की कुल संख्या 2.68 करोड़ थी, जो संपूर्ण जनसंख्या का लगभग 2.21 प्रतिशत बैठती है। वहीं, अधिकारों से जुड़े 2016 के संबंधित कानून की अनुसूची में कुल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को मान्यता दी गई है।

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