उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने अपने आप को अफगानिस्तान का राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति अशरफ गनी देश के बाहर हैं। इसलिए संविधान के अनुसार अब मैं राष्ट्रपति हूं। मैं सभी से समर्थन की अपील करता हूं।
तालिबान के राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने दो दिन पहले देश छोड़ दिया था। तब ये अटकलें लग रही थीं कि उनके साथ उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने भी अफगानिस्तान छोड़ दिया है। हालांकि, सालेह के बारे में बताया जा रहा है कि वे अभी पंचशील में हैं, जहां तालिबान के खिलाफ आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बाद काबुल से भारतीयों को लाने का सिलसिला जारी है। इंडियन एयरफोर्स का सी-17 विमान मंगलवार शाम 4 बजे अफगानिस्तान में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर हिंडन एयरबेस पहुंचा। विमान को लैंड किए 2 घंटे से ज्यादा बीतने के बाद लोगों को बसों और अन्य वाहनों के जरिए उनके घर भेजा गया। रासते में लोगों ने जय श्रीराम के नारे भी लगाए।
काबुल से आया यह विमान सुबह 150 लोगों को लेकर सबसे पहले जामनगर उतरा था। यहां घबराए लोगों को ब्रेकफास्ट कराया गया। इसके बाद इन्हे दिल्ली के हिंडन एयरबेस पर लाया गया है। यहां से लोगों को उनके घर भेजा जाएगा।
नाटो ने मंगलवार को अफगानिस्तान सरकार को नाकमा बताया। नाटो ने कहा कि सरकार की नाकामी की वजह से तालिबान ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति तो बाइडेन ने भी आज यहीं बात कही थी। बाइडेन ने आज एक ट्वीट किया और लिखा, ‘मैं कहता था फोकस आतंकवाद से मुकाबले पर हो। राष्ट्र निर्माण या जवाबी कार्रवाई पर न हो।’
काबुल एयरपोर्ट पर भारी गोलीबारी की आवाज सुनी गई है। मौके पर मौजूद अल जजीरा रिपोर्टर का कहना है कि तालिबान ने एयर पोर्ट से अल जजीरा का लाइव ब्रॉडकास्ट रुकवा दिया। कई और लोगों ने काबुल एयरपोर्ट पर हुई गोलीबारी के बारे में सोशल मीडिया पर लिखा है।
काबुल एयरपोर्ट और पंजशीर को छोड़ पूरा अफगानिस्तान अब तालिबान के कब्जे में है। इस बीच तालिबान की संस्कृति परिषद का प्रमुख जबीउल्लाह मुजाहिद आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। जबीउल्लाह को दुनिया पहली बार देखेगी, क्योंकि अभी तक उसकी कोई तस्वीर सामने नहीं आई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वह बताएगा कि तालिबान का शासन कैसा होगा, यानी वह अफगानिस्तान में तालिबानी संस्कृति लागू करने का रोडमैप बताएगा।
आशंका है कि जबीउल्लाह महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां लगाने का ऐलान कर सकता है। हालांकि तालिबान ने महिलाओं से सरकार में शामिल होने की अपील करते हुए कहा है कि वे महिलाओं को परेशान नहीं करना चाहते।
काबुल में राष्ट्रपति भवन के बाहर महिलाओं के एक छोटे समूह ने सरकार और प्रशासन में भागीदारी की मांग को लेकर प्रोटोस्ट किया। तालिबान के सामने ये प्रोटेस्ट हुआ, हालांकि तालिबान ने कुछ नहीं कहा। काबुल से एक महिला अधिकार कार्यकर्ता ने ये वीडियो भास्कर को भेजा है। अफगानिस्तान में एक महिला मामलों का मंत्रालय भी है। आज तालिबानी इसके बाहर भी सुरक्षा में खड़े थे।
मुल्ला बरादर तालिबान के दल के साथ कतर से कंधार पहुंचे हैं। उनके साथ मुल्ला मोहम्मद फजल भी है जो कभी ग्वाटेनामो बे जेल में कैद थे। मुल्ला फजल पहली तालिबान सरकार में रक्षा मंत्री थे।