जलालाबाद में तालिबान ने भीड़ पर की फायरिंग, 3 की मौत

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की वापसी हो गई है। तालिबान का सह-संस्थापक और राजनीतिक प्रमुख मुल्ला बरादर दोहा से कंधार लौट आया है। तालिबान के शासन में वह अफगानिस्तान का राष्ट्रपति हो सकता है।

इधर, राजधानी काबुल से 80 किलोमीटर दूर जलालाबाद शहर में तालिबान को आम जनता का विरोध झेलना पड़ रहा है। यहां लोगों ने तालिबानी हुकूमत के बीच अफगानिस्तान का झंडा लगा दिया, जिसे तालिबान ने हटाकर अपना झंडा लगाने की कोशिश की। इस दौरान लोगों की तालिबानियों से झड़प हो गई और लोगों को डराने के लिए तालिबानियों से फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की खबर है।

इस बीच, तालिबानियों ने अफगानी सेना के 4 कमांडरों को कंधार के एक स्टेडियम में भीड़ के सामने मौत के घाट उतार दिया। सूत्रों के मुताबिक, घटना 15 अगस्त की है। इसी दिन राजधानी काबुल पर अफगानियों ने कब्जा किया था। सूत्रों के मुताबिक, इन कमांडरों ने 13 अगस्त को तालिबान के सामने आत्मसमर्पण किया था। तालिबान ने इन्हें आम माफी की घोषणा करने से पहले मारा है।

अफगानिस्तान को बचाने के लिए बनाए गए फ्रंट नॉर्दन अलायंस ने तालिबान के खिलाफ जंग छेड़ दी है। तालिबानी हुकूमत के बीच पंजशीर घाटी में नॉर्दन अलायंस का झंडा फहराया गया है। 2001 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। ऐसी खबरें हैं कि तालिबान से बचने के लिए जो अफगानी सैनिक छिप गए थे वे अब पंजशीर पहुंचे रहे हैं। ये सैनिक दिवंगत अफगानी पॉलिटिशियन अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद की अपील पर पंजशीर में इकट्ठे हो रहे हैं।

एक बड़े घटनाक्रम में तजाकिस्तान में अफगान दूतावास ने इंटरपोल के जरिए भगोड़े राष्ट्रपति अशरफ गनी, हमदुल्ला मोहिब और फजलुल्लाह महमूद फाजली को गबन के आरोप में हिरासत में लेने का निर्देश दिया है। रूसी मीडिया ने दावा किया था कि 15 अगस्त को काबुल पर तालिबान के कब्जे से पहले गनी ने हेलिकाॅप्टर में पैसा भरकर देश छोड़ दिया था। वे अपने साथ चार कारें भी ले गए हैं। हेलिकॉप्टर में जगह की कमी के कारण उन्होंने कुछ बैग रनवे पर ही छोड़ दिया था। ताजकिस्तान में अफगान दूतावास से अशरफ गनी की तस्वीर की जगह उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह की तस्वीर लगा दी है। सालेह ने एक दिन पहले ही गनी की अनुपस्थिति में खुद को अफगानिस्तान का राष्ट्रपति घोषित किया था।

इस बीच, पाकिस्तान का तालिबान प्रेम धीरे-धीरे दुनिया के सामने आने लगा है। तालिबान के सक्रिय सदस्य मुल्ला मोहम्मद रसूल को पाकिस्तान सरकार ने 5 साल जेल में रखने के बाद रिहा कर दिया है। रसूल को तालिबान से अलग हो कर एक नया गुट बनाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि अब वह तालिबान के पाले में लौट आया है।

जलालाबाद में लोग अफगानिस्तान का झंडा लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। वे मांग कर रहे हैं कि अफगानिस्तान के मौजूदा झंडे को ही राष्ट्रीय ध्वज बनाए रखा जाए। इससे पहले मंगलवार को पाकिस्तान की सीमा से लगे खोस्त प्रांत में भी लोगों ने अफगानी झंडा लेकर प्रदर्शन किया था।

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार बनाने की कोशिश में जुटा है। इसी सिलसिले में तालिबानी नेताओं ने बुधवार को अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की है। करजई के अलावा मीटिंग में अफगानिस्तान की पूर्व सरकार के शांतिदूत अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह भी मौजूद थे। तालिबान की ओर से आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के नेता अनस हक्कानी ने इस बैठक की अगुवाई की। वह तालिबान के टॉप-4 नेताओं में माना जाता है।

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