अफगानिस्तान में अंतरिम सरकार बनाने के बाद तालिबानियों ने शरिया कानून के तहत महिलाओं को किसी भी खेल में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है। तालिबान के संस्कृति आयोग ने गुरुवार को कहा कि महिलाएं क्रिकेट समेत उन सभी खेलों में शामिल नहीं हो सकतीं जिसमें उनका चेहरा या शरीर का कोई भाग दिखता हो।
तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के उप प्रमुख अहमदुल्ला वासिक ने कहा, ‘महिलाओं को क्रिकेट समेत उन तमाम खेलों में शामिल नहीं होना चाहिए जिसमें उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जहां उनका चेहरा और शरीर ढका नहीं होगा। इस्लाम महिलाओं को इस तरह देखने की इजाजत नहीं देता है।’
तालिबानी सरकार में शामिल हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों को ब्लैकलिस्ट करने पर तालिबान ने अमेरिका को धमकाया है। तालिबान ने कहा है कि हक्कानी के कुछ सदस्य जो कि हमारी सरकार में शामिल हैं, उन्हें अमेरिका के अधिकारी टारगेट पर होने की बात कह रहे हैं। ऐसे बयान देकर वे दोहा समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं यह किसी के हित में नहीं है। तालिबान ने कहा है कि हक्कानी साहब के परिवार के लोग ही इस्लामिक अमीरात की सरकार में शामिल हैं, ये कोई अलग नाम या संगठन नहीं है।
तालिबान भले ही पंजशीर घाटी को जीतने का दावा कर रहा हो, लेकिन अहमद मसूद की अगुवाई वाली रेजिस्टेंस फोर्स ने दावा किया है कि पंजशीर का 60% इलाका अब भी उनके पास है और जंग में तालिबान को भारी नुकसान हुआ है। CNN न्यूज से बातचीत में रेजिस्टेंस फोर्स के एक सदस्य ने ये दावा किया है।
अफगानी महिलाओं पर तालिबानी बंदिशों के बीच ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड ने तालिबान को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि अगर तालिबान ने महिलाओं के खेलने पर रोक लगाई तो अफगानिस्तान की मेन्स टीम के साथ नवंबर में प्रस्तावित पहला टेस्ट मैच रद्द कर दिया जाएगा।ऑस्ट्रेलिया ने ये चेतावनी तालिबान के उस फरमान के बाद दी है, जिसमें तालिबानी कल्चर कमीशन के प्रमुख अहमदुल्लाह वासिक ने कहा था कि हमारे शासन में महिलाएं क्रिकेट या कोई और गेम नहीं खेलेंगी। वासिक ने कहा था कि क्रिकेट में महिलाओं को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है कि उनका चेहरा और शरीर ढका नहीं रहे और इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है।
अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के ऐलान 24 घंटे बाद संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। बुधवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान के बड़े शहरों पर तालिबान के कब्जे से पहले सरकार विरोधी तत्वों ने पूरे अफगानिस्तान में बड़े हमले किए थे। हालांकि, ये नहीं बताया गया है कि ये सरकार विरोधी तत्व कौन थे। रिपोर्ट के मुताबिक 16 मई से 31 जुलाई के बीच अफगानिस्तान में 18 फिदायीन हमले हुए थे, इनमें से 16 हमले ऐसे थे जिनमें कार में IED रखकर अफगानी सुरक्षाबलों को निशाना बनाया गया था।