पुतिन ने फिर दी बाइडेन को चुनौती:

रूस की प्रमुख खुफिया एजेंसी ने अब एक नए साइबर जासूसी अभियान के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को चुनौती दी है। माइक्रोसाफ्ट के अधिकारी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि रूसी एजेंसी नया अभियान चलाकर अमेरिकी सरकार, कारपोरेट कर्मचारियों और थिंक टैंक के हजारों कंप्यूटर में सेंध लगाने का प्रयास कर रही है। करीब छह महीने पहले बाइडेन ने दुनियाभर में जटिल खुफिया अभियानों की श्रृखंला चलाने के आरोप में रूसी संस्थानों और कई कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे।

माइक्रोसाफ्ट के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी टाम बर्ट ने बताया कि नया अभियान बेहद बड़ा है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। अमेरिकी सरकारी अधिकारियों ने भी इस अभियान की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रूसी खुफिया एजेंसी एसवीआर की ओर ये मुहिम क्लाउड डेटा हासिल करने के लिए शुरू किया गया है। एसवीआर ने ही वर्ष 2016 के चुनाव में पहली बार डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के नेटवर्क में सेंध लगाई। राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने इस साल की शुरुआत में एसवीआर पर सोलरविंड्स सॉफ्टवेयर में सेंधमारी का आरोप लगाया था।

यह काफी जटिल सॉफ्टवेयर माना जाता है, जिसका इस्तेमाल अमेरिका की सरकारी एजेंसियां व बड़ी कंपनियां करती हैं। आरोप है कि सॉफ्टवेयर में बदलाव के जरिए रूसी खुफिया एजेंसी ने 18 हजार यूजर तक पहुंच बना ली थी। इससे नाराज बाइडेन ने अप्रैल में रूस के वित्तीय संस्थानों व प्रौद्योगिकी कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगा दिया था। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद उन्होंने प्रतिबंधों को वापस ले लिया था।

अमेरिकी अधिकारी ने जोर देकर कहा कि माइक्रोसाफ्ट की रिपोर्ट से पता चलता है कि जिस उस श्रेणी की जासूसी में आते हैं जो प्रमुख शक्तियां एक-दूसरे के खिलाफ करती रहती हैं। होमलैंड सुरक्षा विभाग में साइबर सुरक्षा एजेंसी के संचालक रहे क्रिस्टोफर क्रेब्स ने कहा कि रूसी हैकर प्रणाली को ही हैक करने में लगे हुए हैं।

2020 में राष्ट्रपति चुनाव के ऐलान के वक्त ही डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे रोकने के आदेश दिए गए थे। केंद्रीय अधिकारियों का कहना है कि देश को साइबर खतरों से बचाने के लिए बाइडेन ने अफसरों से दो टूक कह दिया है कि सेंधमारी न होने पाए।

हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि हालिया हमले कितने सफल रहे, लेकिन माइक्रोसाफ्ट का कहना है कि उसने हाल में हैकरों द्वारा 600 संगठनों के नेटवर्क में प्रवेश करने के लिए 23 हजार बार प्रयास किए जाने का पता लगाया है। तुलना करते हुए कंपनी ने कहा कि पिछले तीन वर्षो के दौरान उसे दुनियाभर में 20,500 लक्षित हमलों का पता चला था। माइक्रोसाफ्ट ने कहा कि हालिया हमलों में से कुछ प्रतिशत सफल रहे हैं, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि इससे कितनी कंपनियां प्रभावित हुईं।

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