वायुसेना की ताकत बढ़ी:100 किलोमीटर दूर से होगा दुश्मन का खात्मा

भारतीय वायुसेना की ताकत में एक और इजाफा हुआ है। राजस्थान के जैसलमेर की जैसलमेर की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और वायु सेना ने स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार के 2 उड़ान परीक्षण किए हैं। इसे संयुक्त रूप से भारत में डेवलप किया गया है। यह वेपन एक तरह की मिसाइल है, जो जगुआर फाइटर प्लेन में लगती है।

सैटेलाइट नेविगेशन और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर पर आधारित 2 अलग-अलग सफल परीक्षण किए गए। बम के इस वर्ग का परीक्षण देश में पहली बार किया गया। इलेक्ट्रो ऑप्टिक सेंसर को स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में इससे पहले 28 अक्टूबर को भी इसका सफल परीक्षण किया गया था। अंतिम और सफल परीक्षण बुधवार को जैसलमेर जिले की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में वायुसेना के प्लेन से लॉन्चिंग कर किया गया।रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस गाइडेड बम को सटीक नेविगेशन प्रणाली की मदद से जगुआर विमान के जरिए छोड़ा गया। यह बम 100 किलोमीटर की रेंज से आगे सटीक तौर पर पहुंचा। सिस्टम का इलेक्ट्रो ऑप्टिकल कॉन्फिगरेशन इमेजिंग इंफ्रा-रेड सीकर तकनीक से लैस है। जो हथियार की सटीक मारक क्षमता को बढ़ाता है। दोनों परीक्षणों में टारगेट को सटीकता के साथ हिट कर मारा गया। सिस्टम को अधिकतम 100 किलोमीटर की दूरी के लिए डिजाइन किया गया है।

स्मार्ट एंटी एयरफील्ड हथियार को अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI) द्वारा अन्य डीआरडीओ लैब के समन्वय और आईएएफ के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, IAF और मिशन से जुड़ी टीमों के प्रयासों की सराहना की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने टीमों को बधाई देते हुए कहा कि हथियार का प्रदर्शन और विश्वसनीयता साबित हो गई है।

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