CG के सबसे बड़े छठ घाट में आस्था का अर्घ्य:

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में छठ महापर्व पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कोरोना काल के बाद पहली बार हो रहे इस आयोजन के चलते लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भगवान सूर्य की पूजा करने बड़ी संख्या में यहां लोग अरपा नदी स्थित छठ घाट में पहुंचे। करीब 25 हजार से ज्यादा लोग छठ घाट पर पहुंचे। जिनके बीच व्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया से सभी मनोकामना पूरी होती है।

बुधवार को गाजे-बाजे के साथ लोग दौरा,गन्ना लेकर छठ घाट पहुंचे। यहां पहले लोगों ने घाट पर स्थित दौरा का पूजा किया। फिर व्रत करने वाल लोग एक-एक कर घाट के अंदर पानी में गए और कमर तक पानी के बीच डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान जिन महिलाओं की मन्नत पूरा हो चुकी है, वह अपने घर से जमीन पर लोटते हुए छठ घाट पहुंची। मान्यता है कि नई सुहागिनें भी पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए छठ का व्रत रखती हैं। छठ पूजा करने लोग नंगे पैर छठ घाट पहुंचे थे।

छठ पर्व यूं तो बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मनाया जाता है। मगर अब लोग इसे पर्व को बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में भी मनाते हैं। बताया जाता है कि बिलासपुर का अरपा नदी स्थित छठ घाट छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा छठ घाट है। दावा यह भी किया जाता है कि यह स्थाई छठ घाट देश का सबसे बड़ा छठ घाटा है। जिसकी चर्चा पूरे देशभर में होती है।कोरोना के बाद पहली बार हो रहे इस आयोजन को लेकर प्रशासन ने भी खासा तैयारी की है। घाट में जगर-जगह सुरक्षा के व्यापक इंत्जाम किए गए हैं। प्रशासन ने छठ पर्व के पहले ही गाइडलाइन भी जारी कर दी थी। जिसके मुताबिक घाट पर पूजा करने वाले लोग ही मौजूद रहेंगे। इसके अलावा भी कुछ जरूरी गाइडलाइन जारी की गई है। वहीं अरपा में इस बार पाटली पुत्र संस्कृति विकास मंच इस बार छठ पर्व आयोजन करा रही है। जिसकी देखराख में यह आयोजन किया जा रहा है।

भगवान सूर्य की उपासना के बाद अब व्रती गुरुवार सुबह उगते सूरज को व्रती अर्घ्य दिया। इसके लिए लोग सुबह 4 बजे से ही घाट में पहुंचेंगे और पानी के अंदर घुसकर भगवान को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद प्रसाद वितरण के बाद महापर्व का समापन हो जाएगा।चार दिनी इस उत्सव में सोमवार को नहाय खाय के साथ मंगलवार को खरना किया गया। खरना के साथ व्रती महिलाओं का 36 घंटे का व्रत शुरू हो गया। सूर्य आराधना के इस पर्व में सूर्य देव की पूजा अर्चना कर छठी मईया की भी पूजा की जाती है।10 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया के साथ ही महिलाएं रात में घर में छठी मईया की पूजा करेंगी। पूरी रात जागरण के बाद 11 नवंबर को तड़के 4 बजे सूर्योदय से पूर्व छठ घाट पहुंचेगी। यहां उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद पूजा का समापन होगा और व्रती महिलाएं पारणा करेंगी।

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