पड़ोसी देश बांग्लादेश में शिक्षा का मेगा प्लान बनाया गया है। सरकार ने इसे पूरा करने के लिए 2025 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका कारण है कि वहां 10 साल तक के आधे से ज्यादा स्कूली बच्चे लिखा हुआ ठीक से पढ़ नहीं पाते हैं। 15 से 24 साल तक की आयु वर्ग के किशोर और युवाओं में से एक तिहाई पढ़ते नहीं है। कोरोना काल में हाल और खराब हुए।
बांग्लादेश के बच्चों के सामने बड़ा सवाल है कि वे पढ़ाई करें या अपने परिवार को सहारा देने के लए रोजगार से जुड़ें। भारत और पाकिस्तान से उलट बांग्लादेश में लड़कों से ज्यादा संख्या में लड़कियां हाईस्कूल में पढ़ रही हैं। पार्टिसिपेशन रिसर्च सेंटर के जियाउर रहमान के अनुसार बांग्लादेश में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव करना आसान काम नहीं था।
बांग्लादेश में बच्चे पहले रटकर परीक्षाएं पास करते थे। तीसरी कक्षा तक परीक्षाएं खत्म कर दी हैं। तीसरी से दसवीं तक भी वार्षिक परीक्षा नहीं पूरे वर्ष के नंबराें को जोड़ा जाता है। बांग्लादेश के उप शिक्षा मंत्री हसन चौधरी का कहना है कि बच्चों को शिक्षा के साथ रोजगार को जोड़ने के लिए वोकेशनल काेर्सेज भी शुरू किए गए हैं।
बांग्लादेश अपने मानव संसाधन के कारण पिछले एक दशक के दौरान सालाना आर्थिक वृद्धि दर को 6 फीसदी रखने में सफल रहा है। कोरोना काल से पूर्व यहां की आर्थिक वृद्धि दर 8 फीसदी थी। इसका बड़ा कारण शिक्षा के क्षेत्र में आया सुधार है। बांग्लादेश में शिक्षा पर जीडीपी का 2.1 फीसदी ही खर्च हो रहा है। वैसे आज लगभग 80 फीसदी बच्चे प्राइमरी तक की पढ़ाई को पूरा करते हैं। पिछले 40 साल पहले बांग्लादेश में केवल एक तिहाई बच्चे ही प्राइमरी तक की पढ़ाई पूरी कर पाते थे।