रूस-यूक्रेन बॉर्डर पर तनाव जारी है। इस बीच अमेरिकी इंटेलीजेंस ने खुलासा किया है कि रूस यूक्रेन पर साल 2022 की शुरुआत में हमला कर सकता है। इस हमले में रूस के 175,000 सैनिकों के शामिल होने का आशंका है।
न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, आधे रूसी सैनिक पहले से ही यूक्रेन बॉर्डर पर तैनात किए जा चुके है। वहीं, शुक्रवार को यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने सांसदों को बताया कि रूस ने बॉर्डर पर फिलहाल 94,300 सैनिक तैनात कर रखे हैं और अगले साल जनवरी में सैनिकों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है।राष्ट्रपति पुतिन अगले हफ्ते एक वर्चुअल मीटिंग के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच यूक्रेन मुद्दे पर बातचीत होने की संभावना है। हालांकि मीटिंग की तारीख का खुलासा नहीं किया गया है।
अमेरिकी इंटेलीजेंस की तरफ से पहले भी 2 बार हमले की आशंका जाहिर की जा चुकी है। वहीं, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के साथ एक फोन मीटिंग के दौरान यूक्रेन की तरफ से हो रहे ड्रोन तैनाती को निशाने पर लिया। दरअसल यह ड्रोन तुर्की ने ही मैन्यूफैक्चर किए हैं।यूक्रेन बॉर्डर की तरफ रूसी टैंक की तैनाती को देखते हुए अमेरिकी इंटेलीजेंस ने अलर्ट जारी किया था। इसे देखते हुए राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा था कि वह व्लादिमीर पुतिन के लिए यूक्रेन पर हमले को बहुत मुश्किल बना देंगे, उनका उद्देश्य रूस के इस हमले को रोकना है। बाइडेन ने कहा कि यूक्रेन बॉर्डर पर स्थिति को देखते हुए वह यूरोपीय देशों के संपर्क में है।
पिछले हफ्ते रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने एक इंटरव्यू में इस बात से साफ इनकार किया था कि रूसी फौज यूक्रेन पर कब्जे के लिए रणनीति बना रही है। उन्होंने कहा था कि रूसी सैनिक अपनी सीमा के अंदर कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं। इसके साथ ही पुतिन ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी थी कि वो रूस को सख्त कदम उठाने पर मजबूर न करें। हालांकि, अब तक कोई भी यह अंदाजा लगाने में कामयाब नहीं हो सका है कि पुतिन के जेहन में आखिर चल क्या रहा है।
वहीं, यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस जनवरी में आक्रमण के लिए तैयार है। रूसी सैनिकों ने बॉर्डर पर विंटर ट्रेनिंग भी शुरू कर दी है। रूस पहले ही ने बाइडेन प्रशासन से यूक्रेन को नाटो गठबंधन में शामिल न करने की मांग कर चुका है। बताया जा रहा है कि रूस हमले से पहले यूक्रेन और नाटो गठबंधन को बदनाम करने के लिए फेक न्यूज फैला रहा है।