अमेरिका में सैकड़ाें कैदी ऐसे हैं, जाे सजा पूरी हाेने के बावजूद जेलाें में हैं। कुछ कैदी ताे ऐसे हैं, जिनका दावा है कि बेगुनाह हैं। ऐसे ही एक कैदी हैं 78 साल के जोसेफ गाेर्डन। वह 37 साल से जेल में हैं। जबकि हत्या के जिस मामले में उन्हें सजा मिली है, कानूनन 25 साल के बाद उन्हें पैराेल का हक है। न्यूयॉर्क में करेक्शनल फैसिलिटी हाेम में कैद गाेर्डन काे 2017 से पांच बार पैराेल पर छाेड़ने की सिफारिश की जा चुकी है, लेकिन पैराेल हर बार सिर्फ इसलिए खारिज कर दी गई कि उन्हाेंने अपराध कबूल नहीं किया है। न ही पश्चाताप व्यक्त किया।
गाेर्डन कहते हैं कि उन्हें जिस डाॅक्टर की हत्या के मामले में सजा दी गई है, उसकी हत्या उन्हाेंने नहीं की। बल्कि यह हत्या उनके बेटे चाड ने की थी। गाेर्डन काे 1991 में वेस्टचेस्टर काउंटी के एक श्वेत डाॅक्टर डैनिएल पैक की हत्या का दोषी ठहराया गया था। इन्नाेसेंस प्राेजेक्ट ने अपनी रिपाेर्ट में कहा है कि कई निर्दाेष कैदी अपनी बात पर अड़े रहते हैं, जिससे उनके पैराेल में कानूनी रुकावट आती है।गाेर्डन ने इस साल मार्च काे पांचवीं बार न्यूयॉर्क स्टेट पैरोल बोर्ड में पैराेल अपील की थी। सुधार अधिकारियों, जेल कर्मचारियों और मनोरोग कार्यकर्ता ने गाेर्डन काे रिहा करने की सिफारिश की। उन्होंने लिखा कि गाेर्डन ने मानसिक रूप से बीमार कई कैदियों का जीवन बदला है। जेल अधीक्षक लेरॉय फील्ड्स ने लिखा कि गाेर्डन केवल दूसरे कैदी हैं, जिनकी रिहाई की सिफारिश उन्हाेंने बताैर सुधार अधिकारी के रूप में की है।
पैरोल बोर्ड के सामने जाेसेफ गाेर्डन ने खुलासा किया कि हत्या उनके बेटे चाड ने की थी। तब चाड 16 साल का था और वे नहीं चाहते थे कि उसे जेल हो़े। गाेर्डन के अनुसार, चाड ने आवेश में डाॅक्टर काे गाेली मारी थी, क्याेंकि उसने यौन संबंध बनाने की काेशिश की थी। वहीं काेर्ट में सुनवाई के दाैरान चाड ने खुद काे बेगुनाह बताया था।