बैंकिंग हड़ताल

सरकारी बैंकों की हड़ताल से अब तक 38 लाख चेक्स की क्लियरिंग नहीं हो पाई है। इससे कुल 37 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर नहीं हो पाए। पहले दिन इसकी वजह से करीबन 19 हजार करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ। आज दूसरे दिन भी 9 लाख बैंकिंग कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

इसमें से करीबन 10,600 करोड़ रुपए के 10 लाख चेक चेन्नई में और 15,400 करोड़ रुपए के 18 लाख चेक मुंबई के बैंकों में फंसे हैं। 11 लाख चेक दिल्ली में फंसे हैं जो 11 हजार करोड़ रुपए के हैं। ऐसी खबर है कि सरकार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 51 पर्सेंट से भी नीचे कर सकती है।बैंक कर्मचारियों की यह हड़ताल सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में है। यूनियन का दावा है कि सरकारी बैंकों का उपयोग सरकार बेलआउट के लिए करती है। यानी, इनके पैसे से दूसरे बैंकों को मदद दी जाती है। इनमें हाल में यस बैंक रहा है। सरकार इस साल सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को निजी बैंक बनाने की योजना में है। बजट में सरकार ने दो बैंकों के निजीकरण की बात कही थी।

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (AIBEA) के महासचिव सी.एच वेंकटचलम ने बताया कि गुरुवार को हड़ताल की वजह से 20 लाख से ज्यादा चेक का क्लियरेंस अटक गया। इसकी वजह से 18,600 करोड़ रुपए के कारोबार पर असर हुआ। इस हड़ताल से चेक का डिपॉजिट, कैश की निकासी और लोन जैसे काम पर ज्यादा असर हो रहा है।हालांकि निजी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं हैं, इसलिए वहां पर काम रोजाना की तरह चल रहा है। निजी सेक्टर के तीन बड़े बैंक HDFC, ICICI और एक्सिस बैंक में कोई दिक्कत ग्राहकों को नहीं है। सरकारी बैंकों के 9 कर्मचारी संगठनों ने इसमें भाग लिया है। इसमें देश के बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक के भी कर्मचारी शामिल हैं।

वैसे ज्यादातर असर चेक क्लियरिंग पर ही हो रहा है, क्योंकि बाकी सेवाएं डिजिटल उपलब्ध हैं, जिसकी वजह से बहुत ज्यादा परेशानी ग्राहकों को नहीं हो रही है। डिजिटल बैंकिंग में ट्रांसफर, ATM से कैश निकासी, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग आदि हैं। अभी तक शहरी इलाकों में ATM में कैश की कोई दिक्कत नहीं आई है। हालांकि, शनिवार को इसमें दिक्कत आ सकती है, क्योंकि दो दिनों से कई ATM में पैसे नहीं डाले गए हैं।

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