भारतीय मूल के लोग दुनियाभर में परचम लहरा रहे हैं। गूगल और ट्विटर जैसी दर्जनों टॉप अमेरिका कंपनियों के सीईओ इंडियन ओरिजन के हैं। अब दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के व्यक्ति ने झंडा बुलंद किया है। 64 साल के नरेंद्रन जोडी कोलापेन को दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च न्याय पीठ (कानूनी बेंच) में नियुक्त मिली है।
राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने उनकी नियुक्ति की है। इसके लिए कई राउंड इंटरव्यू लिए गए थे। नरेंद्रन इससे पहले भी 2 बार टॉप बेंच में शामिल होने के अप्लाई कर चुके थे। लेकिन उन्हें तीसरी बार में सफलता मिली। उन्हें ज्यूडिशरी में बेहतरीन करियर होने के कारण इस पद के लिए चुना गया है।
सर्वोच्च न्यायपीठ में 2 पदों के लिए 5 जजों ने अप्लाई किया था। कोलापेन के अलावा अफ्रीकी मूल के रम्माका स्टीवन मथोपो की भी नियुक्ति की गई है। दोनों ही 1 जनवरी 2022 को नए साल में अपना पद ग्रहण करेंगे।
दक्षिण अफ्रीका की हाईकोर्ट में जज कोलापेन ने 1982 में लीगल प्रेक्टिस शुरू की थी। 1993 में उन्होंने लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स ग्रुप ज्वाइन किया और 2 साल बाद 1995 में इसके निदेशक बन गए। 1997 में उन्हें साउथ अफ्रीकन ह्यूमन राइट्स कमीशन का कमिश्नर बनाया गया। उन्होंने 7 साल तक इस संस्था का नेतृत्व किया। 2016 में उन्हें साउथ अफ्रीकन लॉ रिफॉर्म कमीशन का अध्यक्ष बनाया गया। कोलापेन ने कई एनजीओ के साथ मिलकर मानवाधिकार और बुजुर्गों के लिए काम किया।
दक्षिण अफ्रीका के हाईकोर्ट में जज रहते हुए 2010 में कोलापेन ने भीरतीय संस्कृति को लेकर एक जरूरी बयान दिया था। उन्होंने शिव ज्ञान सभा की 50वीं सालगिरह के कार्यक्रम में कहा था कि 150 साल पहले भारत से अफ्रीका आए गिरमिटिया मजदूरों को शर्म के साथ जीने की जरूरत नहीं है। वो अपने साथ यहां एक नई संस्कृति लेकर आए हैं।
उन्होंने आगे कहा था कि हमें दक्षिण अफ्रीका को इंद्रधनुष के रंग की तरह अलग-अलग संस्कृतियों वाला देश बनाना है। गिरमिटिया मजदूर उन्हें कहा जाता है, जिनसे अंग्रेज भारत या दूसरे देशों से अफ्रीका ले जाकर मजदूरी करवाते थे।