नवा रायपुर के विकास से प्रभावित किसानों का आंदोलन गरमाता जा रहा है। 27 गांवों के किसान पिछले 20 दिनों से नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) भवन के बाहर तंबू डालकर बैठे हैं। सरकार से अभी औपचारिक बातचीत भी शुरू नहीं हो पाई है। इसकी वजह किसान प्रतिनिधियों के साथ मंत्री का व्यवहार बताया जा रहा है। किसान अब सरकार से हर बात लिखित में करने के रुख पर आ गए हैं।
नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष रूपन चंद्राकर ने बताया, क्षेत्रीय विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने प्रभावित गांव के सरपंचों को बातचीत के लिए बुलाया था। इसके लिए उनके बंगले से फोन आया था। 13 जनवरी को कई गांवों के सरपंच और कुछ पूर्व सरपंच और जिला पंचायत सदस्य उनसे मिलने पहुंचे। मुलाकात हुई तो मंत्री ने पूछा – यहां कैसे आना हुआ! रूपन चंद्राकर ने बताया, सरपंचों ने आंदोलन स्थल पर आकर इसकी जानकारी दी तो सभी ने इसे अपमान बताया। उस दिन तय हुआ कि बिना लिखित आमंत्रण के कोई प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों अथवा मंत्रियों से मिलने नहीं जाएगा।
20 जनवरी को मंत्री के यहां से बातचीत के लिए फोन से ही बुलावा आया। कहा गया, चर्चा के लिए वन मंत्री मोहम्मद के आवास पर बैठक रखी गई है। किसान नेताओं ने साफ कर दिया कि लिखित आमंत्रण के बिना उनका कोई प्रतिनिधि बातचीत में शामिल नहीं होगा। बाद में मंत्री शिव डहरिया के लेटरपैड पर बातचीत का आमंत्रण भेजा गया।
मंत्री शिव डहरिया का कहना है, किसान कल्याण समिति ने बैठक में उपस्थिति के लिए लिखित में पत्र देने को कहा था। उन्हें लिखित में भी बैठक में उपस्थिति की सूचना दी गई, लेकिन वे लोग नहीं आए। इधर किसान कल्याण समिति के रूपन चंद्राकर का दावा है कि वह पत्र उन्हें प्रस्तावित बैठक के समय से कुछ देर पहले मिला। ऐसे में उन लोगों का पहुंचना संभव नहीं था।सरकार अब किसान संगठन से बातचीत की दूसरी तारीख तय करने की कोशिश में है। मंत्री शिव कुमार डहरिया ने बताया, जल्दी ही नई तारीख तय कर ली जाएगी। इधर किसान नेता रूपन चंद्राकर का कहना है, संगठन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बैठक की सूचना समय से मिल जाए तो यह आसान होगा।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भी किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया है। जकांछ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा, नवा रायपुर के लिए जमीन देने वाले किसानों को वह अधिकार नहीं मिला जिसका अनुबंध किया गया था। भाजपा ने 15 साल और कांग्रेस ने तीन साल राज किया लेकिन हालात नहीं बदले। सरकार में थोड़ी भी नैतिकता हाे तो किसानों की मांग पूरी करे।आंदोलन के जड़ पकड़ने के साथ ही प्रदेश के दूसरे किसान संगठन भी नवा रायपुर में जुटने लगे हैं। नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति, छत्तीसगढ़ किसान-मजदूर महासंघ का हिस्सा है। ऐसे में महासंघ से जुड़े संगठन पहले दिन से ही आंदोलन के साथ खड़े हैं। दूसरे किसान और सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया है।