216 फुट ऊंची स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी:मोदी ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति का लोकार्पण किया

216 फुट ऊंची स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी:मोदी ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति का लोकार्पण किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को बसंत पंचमी के मौके पर हैदराबाद पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री वैष्णव संत रामानुजाचार्य स्वामी की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी’ देश को समर्पित किया। इस प्रतिमा को करीब 1000 करोड़ रुपए की लागत से बने रामानुजाचार्य मंदिर में स्थापित किया गया है।

लोकार्पण के बाद मोदी ने कहा- गुरु के माध्यम से ज्ञान की प्राप्ति होती है। 108 गुरुओं से जितना ज्ञान मिलता है, उतना मुझे रामनानुजचार्य जी के यहां आने से मिल गया। दुनिया की अधिकांश सभ्यता और दर्शन को या तो स्वीकार किया गया है या खंडन किया गया है। भारत में मनीषियों ने ज्ञान को खंडन, मंडन स्वीकृति और अस्वीकृति से ऊपर उठ कर देखा है। जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जी की इस भव्य विशाल मूर्ति के जरिए भारत मानवीय ऊर्जा और प्रेरणाओं को मूर्त रूप दे रहा है। ये प्रतिमा रामानुजाचार्य जी के ज्ञान, वैराग्य और आदर्शों की प्रतीक है। रामानुजाचार्य जी ने संस्कृत और तामिल दोनों को महत्व दिया।

प्रधानमंत्री मोदी शाम 5 बजे शमशाबाद स्थित ‘यज्ञशाला’ पहुंचकर यहां चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए हैं। पुजारियों ने उनका तिलक आदि कर उन्हें रुद्राभिषेक में शामिल किया है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद उन्होंने 11वीं सदी के संत और समाज सुधारक रामानुजाचार्य की 216 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण कर उसे देश को लोकार्पित किया। स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी अष्टधातु से बनी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा है। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी को समर्पित करने से पहले पीएम मोदी हैदराबाद के पाटनचेरु में इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर द सेमी-अरिड टॉपिक्स (ICRISAT) की गोल्डन जुबली सेरेमनी में भी शामिल हुए। यहां उन्होंने डिजिटल एग्रीकल्चर को भारत का फ्यूचर बताया। ​​​

पीएम मोदी ने कहा कि बदलते हुए भारत का एक महत्वपूर्ण पक्ष है- डिजिटल एग्रीकल्चर। ये हमारा फ्यूचर है और इसमें भारत के टेलेंटेड युवा, बहुत बेहतरीन काम कर सकते हैं। डिजिटल टेक्नॉलॉजी से कैसे हम किसान को मजबूत कर सकते हैं, इसके लिए भारत में प्रयास निरंतर बढ़ रहे हैं।

क्रॉप असेसमेंट, ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव जैसे एरिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग बढ़ाया जा रहा है। भारत ने अपने केंद्रीय बजट 2022-23 में भी हर सेक्टर में ग्रीन फ्यूचर को बढ़ावा देने के अपने कमिटमेंट को दिखाया है। हम दोहरी रणनीति पर काम कर रहे हैं। आज भारत में हम FPO और एग्रीकल्चर वैल्यू चेन के निर्माण पर भी बहुत फोकस कर रहे हैं। देश के छोटे किसानों को हजारों FPO में संगठित करके हम उन्हें एक जागरूक और बड़ी मार्केट फोर्स बनाना चाहते हैं।हम दोहरी रणनीति पर काम कर रहे हैं। एक तरफ हम जल संरक्षण के माध्यम से नदियों को जोड़कर एक बड़े क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में ला रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ, हम कम सिंचित क्षेत्रों में जल उपयोग की क्षमता बढ़ाने के लिए माइक्रो इरिगेशन पर जोर दे रहे हैं। हम फूड सिक्योरिटी के साथ-साथ न्यूट्रीशियन सिक्योरिटी पर भी फोकस कर रहे हैं। इसी विजन के साथ बीते 7 सालों में हमने अनेक बायो-फोर्टिफाइड वैराइटीज का विकास किया है।

पीएम मोदी ने ICRISAT की गोल्डन जुबली सेरेमनी में स्मारक डाक टिकट और इंस्टिट्यूट का नया लोगो भी लॉन्च किया। साथ ही उन्होंने ‘क्लाइमेट चेंज रिसर्च फैसिलिटी ऑन प्लांट प्रोटेक्शन’ का उद्घाटन भी किया। उन्होंने इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट्स की तारीफ की और कहा, आपके पास 5 दशकों का अनुभव है। इन 5 दशकों में आपने भारत सहित दुनिया के एक बड़े हिस्से में कृषि क्षेत्र की मदद की है।

पीएम ने कहा, आपकी रिसर्च, आपकी टेक्नॉलॉजी ने मुश्किल परिस्थितियों में खेती को आसान और सस्टेनेबल बनाया है। जैसे भारत ने अगले 25 सालों के लिए नए लक्ष्य बनाए हैं, उन पर काम करना शुरू कर दिया है। वैसे ही अगले 25 साल ICRISAT के लिए भी उतने ही अहम है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने ICRISAT परिसर में एक प्रदर्शनी भी देखी।मोदी ने कहा, भारत ने 2070 तक नेट जीरो का टारगेट तो रखा ही है। साथ ही भारत ने दुनिया के सामने ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ की जरूरत को भी उजागर किया है। भारत ने क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए दुनिया से इस पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है। प्रो प्लेनेट पीपुल एक ऐसा मूवमेंट है, जो क्लाइमेट चैलेंज से निपटने के लिए हर कम्युनिटी को, हर आदमी को क्लाइमेट रिस्पॉन्सबिलिटी से जोड़ता है। ये सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत सरकार के एक्शन्स में भी दिखाई देता है।भारत में 15 एग्रो-क्लाइमेट जोन हैं। हमारे यहां, वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर, ये 6 ऋतुएं भी होती हैं यानी हमारे पास एग्रीकल्चर से जुड़ा बहुत विविध और बहुत प्राचीन अनुभव है। क्लाइमेट चैलेंज से अपने किसानों को बचाने के लिए हमारा फोकस ‘बेसिक्स पर लौटने’ और ‘फ्यूचर की तरफ बढ़ने’ के मिश्रण पर है। हमारा फोकस देश के उन 80% से अधिक छोटे किसानों पर है, जिनको हमारी सबसे अधिक ज़रूरत है। इन छोटे किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन बहुत बड़ा संकट बन जाता है।

पीएम मोदी से पहले इस सेरेमनी में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, एक बार ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया गया था। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इसमें ‘जय विज्ञान’ का मंत्र जोड़ा था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक इसमें एक नया नारा ‘जय अनुसंधान’ जोड़ने की पहल की है।

तोमर ने कहा, यह आजादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है। ICRISAT के भी 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये हमें प्रेरणा प्रदान करने वाले अवसर हैं, हमारे संकल्प को पूर्ण करने का समय है और आने वाले 25 वर्षों के लिए नए संकल्प लेकर चलने का समय है।

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