कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है। गुरुवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम के हालात पर नजर डालें तो यह कहावत सच नजर आती है। करीब 11 साल पहले बराक ओबामा अमेरिकी राष्ट्रपति थे और बाइडेन उनके लेफ्टिनेंट, यानी उप राष्ट्रपति। तब 2 मई 2011 तारीख थी और अमेरिकी सील कमांडोज ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में एक स्पेशल ऑपरेशन के दौरान अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।
इस बार तारीख थी 3 फरवरी 2022 और जगह थी सीरिया की राजधानी दमिश्क के करीब एक कस्बा। इस बार इस्लामिक स्टेट, यानी ISIS का सरगना इब्राहिम अल हाश्मी अल कुरैशी मारा गया।कहा जा रहा है कि हाश्मी को अमेरिकी कमांडोज ने नहीं मारा, बल्कि उसने गिरफ्तारी के डर से खुद को बम से उड़ा लिया। वैसे इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि ISIS का यह मोडस ऑपरेंडी, या काम करने का तरीका है। हालांकि, CNN के एक प्रोग्राम में हाश्मी के खुद को बम से उड़ा लेने की थ्योरी पर सवाल उठाया गया है। वहीं, NYT से बातचीत में व्हाइट हाउस के एक अफसर ने कहा- लगता तो यही है कि घिर जाने के बाद हाश्मी ने खुद को खत्म कर लिया।
जब लादेन मारा गया था, तब प्रेसिडेंट ओबामा अपनी टीम के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में मौजूद थे। इसका फोटोग्राफ खुद व्हाइट हाउस के प्रेस स्टाफ ने जारी किया था। ओबामा के चेहरे पर तनाव साफ देखा जा सकता था। करीब 14 हजार किलोमीटर दूर US नेवी की एलीट सील कमांडो फोर्स पाकिस्तान में दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी को मार गिराने के लिए स्याह रात में ऑपरेशन कर रही थी। कमांडोज के हेलमेट्स पर नाइट विजन कैमरे लगे थे। इनके जरिए तस्वीरें सीधे व्हाइट हाउस पहुंच रहीं थीं।
गुरुवार को ISIS के सरगना इब्राहिम अल हाश्मी अल कुरैशी को US एयरफोर्स की एलीट कमांडो यूनिट ने सीरिया में मार गिराया। करीब 12 हजार किलोमीटर दूर अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में बैठी प्रेसिडेंट बाइडेन की टीम ने लाइव देखा। इसकी तस्वीर भी व्हाइट हाउस के प्रेस स्टाफ ने जारी की। बाइडेन की चेहरे पर भी वही तनाव नजर आ रहा था जो 11 साल पहले उनके बॉस ओबामा के चेहरे पर देखा गया था। संयोग तो कई हैं, लेकिन बड़ा फर्क आप एक ही नोटिस कर पाएंगे। और वो ये कि लादेन के मारे जाने के वक्त ओबामा प्रेसिडेंट चेयर के बजाए एक साधारण कुर्सी पर थे, जबकि बाइडेन प्रेसिडेंट चेयर पर नजर आए।
CNN के मुताबिक, ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मार गिराने के लिए जो ऑपरेशन किया गया था, बाइडेन उसके पक्ष में नहीं थे। दरअसल, बाइडेन को लगता था कि वो सिविलियन एरिया है और अगर प्लान में जरा भी गड़बड़ होती है तो आम लोग मारे जा सकते हैं। दूसरी बात, लादेन के घर से चंद किलोमीटर दूर पाकिस्तान की एयरफोर्स का बेस स्टेशन था।
पाकिस्तानी सैनिकों और अमेरिकी कमांडोज में टकराव हो सकता था। अब इसे संयोग कहें या कुछ और कि जो ‘जो बाइडेन’ ऑपरेशन लादेन में हिचकिचा रहे थे, उन्हें हाश्मी को ढेर करने के लिए स्पेशल ऑपरेशन की हरी झंडी देनी पड़ी। एक बात और लादेन को मारने के लिए जो ऑपरेशन किया गया था, उसकी कमांडो तैयारी में 2 महीने लगे थे। इस बार हाश्मी को मारा गया तो भी तैयारी में करीब इतना ही वक्त लगा।