अमेरिका के वैज्ञानिकों ने पहली बार ‘स्टेमसेल ट्रांसप्लांट’ के जरिये एचआईवी संक्रमित महिला का उपचार कर उसे वायरस से मुक्त करने में सफलता पाई है। स्टेमसेल एक ऐसे व्यक्ति ने दान किए थे, जिसके अंदर HIV वायरस के खिलाफ कुदरती प्रतिरोधक क्षमता थी।
बता दें कि अब तक HIV को लाइलाज माना जाता था, लेकिन कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की डॉ. इवोन ब्राइसन और बाल्टीमोर की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की डॉ. डेब्रा परसॉड के नेतृत्व में जारी एक विशेष अध्ययन को ध्यान में रखते हुए इलाज की कई प्रक्रियाओं को पूरा किया गया है। डॉक्टरों ने पहली बार गर्भनाल के खून का इस्तेमाल महिला के ल्युकेमिया का इलाज करने के लिए किया। फिलहाल महिला 14 महीने से स्वस्थ है।
खास बात यह है कि अब महिला को किसी भी दवा की जरूरत नहीं पड़ी है। HIV से मुक्ति पाने वाली वह दुनिया की पहली महिला और कुल तीसरी मरीज है। अब तक दुनियाभर में केवल 3 लोग ही इस बीमारी से ठीक हो पाए हैं।
द बर्निल पेंशेंट के नाम से जाने गए टिमोथी रे ब्राउन 12 सालों तक वायरस के चंगुल से मुक्त रहे। साल 2020 में कैंसर की वजह से उनकी मौत हो गई। वहीं, साल 2019 में HIV संक्रमित एडम कैस्टिलेजो के इलाज में भी कामयाबी मिली।
साल 2013 में महिला को HIV संक्रमित होने का पता चला था। करीब 4 साल बाद, उसे ल्यूकेमिया के बारे में पता चला। इस ब्लड कैंसर का इलाज हैप्लो-कॉर्ड ट्रांसप्लांट के जरिये किया गया। साल 2017 में महिला का आखिरी ट्रांसप्लांट किया गया। वह पिछले 4 सालों से ल्यूकेमिया से ठीक है। ट्रांसप्लांट के 3 साल बाद डॉक्टरों की टीम ने उनका HIV इलाज बंद कर दिया था। इसके बाद से वह किसी वायरस की चपेट में नहीं आई हैं।