यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की तरफ से फ्लाइट्स नहीं मिलने को लेकर की जा रही शिकायत के बाद भारत सरकार एक्टिव हो गई है। सरकार ने कोरोना वायरस के कारण एयर बबल एग्रीमेंट के तहत यूक्रेन आने-जाने के लिए सीमित फ्लाइट्स संचालित करने का प्रतिबंध हटा लिया है। इंडियन एविएशन मिनिस्ट्री (MOCA) ने आज इसकी घोषणा कर दी और कहा कि अब यूक्रेन के लिए एयरलाइंस कितनी भी फ्लाइट्स संचालित कर सकती हैं। साथ ही स्पेशल चार्टर्ड फ्लाइट्स भी ऑपरेट की जा सकती हैं।
MOCA ने फ्लाइट्स की संख्या पर लगे कैप को हटाने के साथ ही भारतीय एयरलाइन कंपनियों से तत्काल यूक्रेन के लिए फ्लाइट्स बढ़ाने का आदेश दिया था। मंत्रालय के इस डिसिजन के बाद एयर इंडिया ने यूक्रेन के लिए स्पेशल फ्लाइट्स चलाने की घोषणा कर दी है।
रूस-यूक्रेन के बीच गहराती युद्ध की आशंकाओं के चलते वहां पढ़ रहे करीब 20 हजार भारतीय छात्र संकट में फंसे हुए हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं। दैनिक भास्कर ने 5 हजार किलोमीटर दूर यूक्रेन में फंसे बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के छात्रों से मंगलवार और बुधवार को बात कर वहां के ताजा हालात जाने थे। छात्रों ने कहा था कि फ्लाइट्स के किराये तीन गुना तक महंगा हो गए हैं और बेहद कम फ्लाइट्स होने के कारण इतना ज्यादा किराया देने पर भी फ्लाइट्स नहीं मिल रही हैं। छात्रों ने सरकार से एयरलिफ्ट कराने की मांग की थी।छात्रों की गुहार सुनते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को ही भारतीय विदेश मंत्रालय के साथ ही यूक्रेन में मौजूद भारतीय दूतावास में भी स्पेशल कंट्रोल रूम बना दिए थे, जो यूक्रेन में मौजूद भारतीय नागरिकों की हर समस्या सुलझाने में मदद करेंगे। साथ ही सरकार ने घोषणा की थी कि दोनों देशों के बीच ज्यादा से ज्यादा फ्लाइट्स का इंतजाम किया जा रहा है। इसके बाद यूक्रेन की राजधानी कीव में मौजूद भारतीय दूतावास ने भी छात्रों को फ्लाइट्स का अरेंजमेंट करने का आश्वासन देने वाला बयान जारी किया था।यूक्रेन मसले को लेकर यूरोप में लगातार बेचैनी बढ़ती जा रही है। बेल्जियम यूनिवर्सिटी में पीजी रिसर्च फैलो देबाशीष पांडा ने रिसर्च के बाद इस सारे मामले में विस्तार से जानकारी दी। देबाशीष ने बताया, यूरोप कई मामलों में रूस पर निर्भर है, अगर युद्ध शुरू होता है तो यूरोपीय अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी। ऐसे में लंबे समय तक यहां रहने वाले भारतीय छात्रों पर भी असर पड़ेगा। युद्ध की आशंका बढ़ने या फिर युद्ध शुरू होने पर भारतीय छात्रों के पास देश लौटने का ही विकल्प बचेगा। अब यूरोप और अमेरिका रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अगली चाल के इंतजार में हैं।
यूरोपीय यूनियन ने यूक्रेन स्थित दूतावास के गैर जरूरी कर्मचारियों को वापस देश लौटने के लिए कहा है। यूनियन के प्रवक्ता पीटर स्टानो ने कहा, हम दूतावास खाली नहीं कर रहे हैं। बस कुछ समय के लिए गैर जरूरी कर्मचारियों को देश के बाहर से टेलीवर्क करने का मौका दे रहे हैं। इटली के विदेश मंत्रालय ने अस्थायी तौर पर अपने नागरिकों को यूक्रेन छोड़ने के लिए कहा है। इसके अलावा डोनेट्सक, लुहान्सक और क्रीमिया क्षेत्र की यात्रा ना करने की सलाह भी दी है।तुर्की ने जरूरी ना होने पर नागरिकों को पूर्वी यूक्रेन ना जाने की सलाह दी है। नीदरलैंड्स और एस्टोनिया ने अपने नागरिकों को जल्द से जल्द यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी है। आयरलैंड ने दूतावास के कर्मचारियों में कमी की है। उल्लेखनीय है कि रूस ने मंगलवार को यूक्रेन की सीमा से अपनी कुछ सेनाओं को हटाने की घोषणा की थी, लेकिन बुधवार को ही नाटो ने इसे रूस का जुबानी जमा खर्च बताकर कहा कि रूस ने अपनी सेनाओं को घटाया नहीं, बढ़ाया है। इस बीच बुधवार को यूक्रेन ने एकता दिवस मनाया।