यूक्रेन पर हमले के विरोध में अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े होने वाले रूसी नागरिक अब ‘न घर के रहे न घाट के’ जैसा महसूस कर रहे हैं। पहले उन्हें सरकार का विरोध करने के लिए अपना देश छोड़ना पड़ा, वहीं अब उन्हें दूसरे देश शरण नहीं दे रहे हैं।
यह दर्द उन 40 रूसी परिवारों का है, जो पिछले दो सप्ताह से मेक्सिको बॉर्डर पर अमेरिका में एंट्री के लिए तंबू गाड़कर बैठे हुए हैं। रॉयटर्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका ने जहां जंग के कारण यूक्रेन छोड़ने वाले रिफ्यूजियों के लिए अपने दरवाजे खोल रखे हैं, वहीं इन यूक्रेनी नागरिकों के हक में आवाज उठाने वाले रूसी परिवारों के लिए अब भी उसने नो एंट्री का बोर्ड लगा रखा है।
रूस के यूक्रेन में हमला करने के दिन 24 फरवरी को मॉस्को की मैथ टीचर इरिना जोलकिना ने युद्ध विरोधी प्रदर्शन में भाग लिया था। नतीजा ये हुआ कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ घंटे बाद उसे छोड़ा गया, लेकिन इतना डरा दिया गया कि उसने अपने चार बच्चों और बेटी के बॉयफ्रेंड के साथ रूस ही छोड़ दिया।
वह ताशकंद और इस्तांबुल होते हुए आखिरकार अमेरिका के कैलिफोर्निया के शहर सैन डियागो के सामने बसे मेक्सिकन बॉर्डर सिटी तिजुआना पहुंच गई। आंखों में आंसू लिए इरिना ने रॉयटर्स से कहा, यह बहुत डरावना है। यूक्रेनी नागरिक अंदर लिए जा रहे हैं। हमें इंतजार करने को कहा जा रहा है।संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, यूक्रेन से 30 लाख से ज्यादा लोग रिफ्यूजी के तौर पर दूसरे देशों में जा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर ने यूक्रेन से सटे देशों में शरण ली है, जबकि कई हजार रूसी नागरिकों ने भी अपना देश छोड़ा है। कुछ यूक्रेनी नागरिक तिजुआना बॉर्डर के जरिए अमेरिका भी पहुंचे हैं। उन्हें एक साल के लिए अमेरिका में रहने का वीजा दे दिया गया है, लेकिन रूसी नागरिकों को यह रिलीफ नहीं मिला है।इस बारे में यूएस होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेट्री अलेजांद्रो मायोरकास ने कहा, सरकार यूक्रेन से भागने वाले लोगों की मदद कर रही है। मानवीय सहायता को दूसरों तक बढ़ाने के लिए अन्य योजनाओं पर अभी विचार चल रहा है। बता दें कि US-मेक्सिको बॉर्डर कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम नीति के चलते शरणार्थियों को एंट्री देने के लिए बंद चल रहा है। रूसियों को लेकर नीति के बारे में पूछने पर होमलैंड सिक्योरिटी के स्पॉक्सपर्सन ने कहा, हम केस-दर-केस के हिसाब से इसका आकलन कर रहे हैं।