बीरभूम हिंसा पर सियासत:

बीरभूम हिंसा पर सियासत:

बीरभूम हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान जारी है। ममता बनर्जी भी बीरभूम में पीड़ित परिवारों से मिलने दोपहर तक पहुंच सकती हैं। सोशल मीडिया पर बीरभूम से ममता के स्वागत में तोरण लगाते हुए लोगों का एक वीडियो सामने आया है। जिससे लोगों का गुस्सा भड़क गया है।

लोग वीडियो-फोटो शेयर कर पूछ रहे हैं कि थोड़ी भी शर्म है ममता दीदी को, तो स्वागत बोर्ड हटवा देती। यहां वो किसी का दर्द बांटने आ रही हैं या चुनाव प्रचार करने आ रही हैं।ममता के मंत्री फिरहाद हकीम बीरभूम के बागतुई पहुंच चुके हैं। वहीं इस मामले में राज्य सरकार को कोलकाता हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट जमा करनी है। पुलिस ने अभी तक हिंसा में शामिल रहे 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी से पूछताछ जारी है। सरकार ने जांच के लिए SIT का गठन किया है।कोलकाता हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि इस मामले के चश्मदीदों, ग्रामीणों और मृतकों के रिश्तेदारों को सुरक्षा देने की जरूरत है। रामपुरहाट के हिंसा प्रभावित इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। कोलकाता हाईकोर्ट ने एक दिन पहले ही घटना स्थल की 24 घंटे निगरानी के लिए कैमरे लगाने का निर्देश दिया था ताकि सुबूतों से छेड़छाड़ न हो सके।

इधर, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी की चिट्ठी का जवाब भेजा है। धनखड़ ने जवाबी पत्र में लिखा है कि मामले को दबाने की कोशिश है, इसलिए SIT का गठन किया गया है। हिंसा के बाद राज्यपाल के वीडियो पर ममता ने ऐतराज जताते हुए पत्र लिखा था और SIT से जांच कराने की मांग की थी।बीरभूम पहुंचे CPIM के स्टेट सेक्रेटरी मो. सलीम ने कहा कि तृणमूल के शासन में पुलिस और सत्ताधारी पार्टी एक-दूसरे के पूरक बन गए हैं। यहां पर अपराधियों का तांडव जारी है। सलीम ने कहा कि नवान्न (सचिवालय) की देखरेख में हिंसा को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि रात के अंधेरे में गांव में अपराधियों ने हिंसा की वारदात को उस समय अंजाम दिया, जब गांव में पुरुष नहीं थे।

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