सुप्रीम कोर्ट में मांग हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा मिले:

सुप्रीम कोर्ट में मांग हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा मिले:

राज्य सरकारें अपनी सीमा में हिंदुओं या किसी भी धार्मिक और भाषाई समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित कर सकती हैं। यह दलील अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दी। दरअसल, भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इसमें उनकी मांग है कि राज्यों में अल्पसंख्यकों की पहचान तय हो और हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए।

अश्विनी की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता की दलील है कि देश के 10 राज्यों में हिंदू भी अल्पसंख्यक हैं, लेकिन उन्हें अल्पसंख्यक योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, न ही वे मदरसों की तरह स्कूल खोल सकते हैं। अब केंद्र के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट आज यानी 28 मार्च को इस मामले में सुनवाई करेगा।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में कहा, ‘हिंदू, यहूदी और बहाई धर्म के अनुयायी किसी भी राज्य में अपनी पसंद के स्कूल-कॉलेज बनाकर चला सकते हैं। राज्य सरकारें उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकती हैं। महाराष्ट्र सरकार ने यहूदियों को, कर्नाटक सरकार ने उर्दू, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी, तुलु, लमणी, हिंदी, कोंकणी और गुजराती भाषी समुदायों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया है।’

हलफनामे में याचिकाकर्ता के उस आरोप को गलत बताया है, जिसमें कहा गया है कि यहूदी, बहाई और हिंदू धर्म के लोग लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में अल्पसंख्यक हैं, लेकिन वे न तो स्कूल-कॉलेज खोल सकते हैं न ही उन्हें चला सकते हैं।मंत्रालय ने कहा कि अगर सिर्फ राज्यों को अल्पसंख्यकों के विषय पर कानून बनाने का अधिकार दिया जाता है तो ये संविधान और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के खिलाफ होगा। संविधान के आर्टिकल-246 के तहत संसद ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक्ट 1992 बनाया है। अगर सिर्फ राज्यों को ही अल्पसंख्यकों पर कानून बनाने का अधिकार दिया जाएगा तो संसद की शक्ति का हनन होगा। केंद्र ने अपनी दलील में टीएमए पई और बाल पाटिल के केसों का जिक्र भी किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *