मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कैबिनेट की बैठक में सिटी बसों के संचालन की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही भिलाई नगर निगम ने बसों के संचालन की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। निगम पुराने ठेका अनुबंध को समाप्त कर नया टेंडर जारी कर रहा है। जल्द ही इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। नई एजेंसी तय हो जाने के बाद बसों के संचालन की बागडोर उसके हाथ में दे दी जाएगी।
दूसरी ओर निगम के डिपो में पिछले लगभग तीन सालों से खड़ी बसों की हालत कंडम हो गई है। चोरों ने बसों के पहिए व अन्य सामान चोरी कर लिए हैं। इस स्थिति में इन बसों को रोड में लाने के लिए निगम को दो करोड़ रुपए से अधिक का फंड मेंटेनेंस के लिए चाहिए। शासन से यह राशि मिलने के बाद जब बस पूरी तरह से बन जाएंगी तभी इनका टेंडर हो सकेगा।
केंद्र सरकार की योजना के तहत शुरू की गई थी सेवा
केंद्र सरकार ने अर्बन ट्रांसपोर्ट योजना के तहत साल 2015 में ग्रामीण इलाकों को शहर से जोड़ने तथा सस्ते दर पर आवागमन के लिए यह योजना शुरू की थी। दुर्ग-भिलाई में 130 करोड़ की लागत से यह योजना शुरू की गई थी। शुरुआत में 115 बसों का टारगेट रखा गया था, लेकिन दुर्ग जिले के लिए सिर्फ 70 बसें ही उपलब्ध कराई गई। उसमें भी 56 बसें ही सड़कों पर दौड़ीं। 13 नई बसें परमिट नहीं मिलने के चलते कबाड़ में तब्दील हो गई।भिलाई नगर निगम के आयुक्त प्रकाश सर्वे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि जल्द ही सिटी बस की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके लिए पुरानी ठेका कंपनी का टेंडर रद्द किया जा रहा है। इस ठेका कंपनी को 70 सिटी बसे खरीदकर साल 2015 में दी गईं थी। इनमें से एक बस जल गई है। पिछले दो तीन सालों से 69 बसें कोरोना संक्रमण के चलते डिपो में खड़ी थीं।