रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (ग्रामीण औद्योगिक पार्क) में बने सामान अब सरकार खरीदेगी। राज्य शासन जिला स्तर पर खरीदी का प्लान करते हुए ऐसे सामान की सूची बना रहा है, जिसे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में बनाकर यहीं से खरीदा जा सकता है। यह सामान वही होगा, जिसे विभागीय बजट या डीएमएफ फंड से खरीदा जाता है।
सरकार की कोशिश है कि सरकारी अस्पतालों और सरकारी स्कूलों में इस्तेमाल सामान ऐसे ही ग्रामीण औद्योगिक पार्क में बनाया जाए, ताकि वहीं इसकी खरीदी हो सके। इसके दो उद्देश्य हैं। पहला, सरकार की इन योजनाओं को कामयाब किया जाए। दूसरा, ग्रामीण इलाकों में युवा किसानों को ऐसे उद्योग या स्टार्टअप खोलने में मदद कर उद्यमी बनाया जा सके।
रूरल इंडस्ट्रियल पार्क, सी- मार्ट और गोठान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ड्रीम प्रोजेक्ट है। सरकार की फ्लैगशिप योजना में शामिल गोठान और रूरल इंडस्ट्रियल पार्कों को प्रोडक्शन सेंटर बनाने की योजना है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और ग्रामीण आबादी आर्थिक रूप से सशक्त हो सके। सरकार इस प्लान के ने गौठानों, रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के साथ ही सी- मार्ट को भी सफल बनाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया है।
इसके तहत रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में ऐसे सामान बनाए जाएंगे, जिनकी सरकारी खरीदी की जा सके। साथ ही इन सामानों को खुले बाजार यानी सी- मार्ट के जरिए भी बेचा जा सके। बता दें कि सी- मार्ट में बेचा जाने वाला सामान स्व सहायता समूह की मदद से बनवाया जा रहा है। आम लोगों के दैनिक उपयोग का सामान भी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में बनाने की तैयारी है, ताकि सरकारी खरीदी के बाद जो भी बचे उसे खुले बाजारों में उतारा जा सके।सरकार रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में गोठानों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाना चाहती है। जहां स्थानीय स्तर पर कलेक्शन, प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की जा सके। सरकार की योजना युवा किसानों को उद्यमी बनाने की है। इसके तहत गांवों के ही पढ़े- लिखे युवाओं को प्रशिक्षित करके उनको स्वावलंबी बनाना है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।
राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को फिलहाल कुर्सी- टेबल, चादर, मच्छरदानी, तकिया और टाट पट्टी जैसे सामानों की लिस्ट भेजी है। साथ ही कहा है कि वे ऐसे ही अन्य सामानों की सूची तैयार करें, जिसे वे विभागीय बजट या डीएमफ फंड से खरीदते रहे हैं।