सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आर्य समाज द्वारा जारी किए जाने वाले मैरिज सर्टिफिकेट को अवैध करार दिया। दरअसल कोर्ट में मध्यप्रदेश की एक नाबालिग लड़की के अपहरण और रेप के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी। मामला लव मैरिज का बताया जा रहा है। लड़की के घरवालों ने उसे नाबालिग बताते हुए अपनी लड़की के अपहरण और रेप की एफआईआर दर्ज करा रखी है, जबकि युवक का कहना था कि लड़की बालिग है। उसने अपनी मर्जी से विवाह का फैसला किया है। आर्य समाज मंदिर में विवाह हुआ है।
इसी दौरान बेंच ने आर्य समाज के विवाह प्रमाण पत्र को वैध मानने से इनकार कर दिया और आरोपी की याचिका को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि आर्य समाज एक हिंदू सुधारवादी संगठन है और इसकी स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में की थी।रेप का आरोप लगाने वाली लड़की बालिग है और उसने आर्य समाज की परंपरा से आरोपी से शादी की थी। इस पर वेकेशन बेंच के जस्टिस अजय रस्तोगी और बीवी नागरत्ना ने वकील की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि विवाह प्रमाण पत्र देना आर्य समाज का काम नहीं है। यह अधिकारियों का काम है। असली सर्टिफिकेट दिखाओ।