सड़क हादसों में घायलों का मेडिकल काॅलेज सह जिला अस्पताल में आने वाले समय में थ्री लेवल ट्राॅमा यूनिट इलाज हो सकेगा। सीजीएमएससी ने टेंडर के बाद इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने जनवरी 2023 तक इसे हैंडओवर करने का टारगेट रखा है।
बहरहाल इस यूनिट के बन जाने के बाद हादसों में घायलों का एक छत के नीचे बेहतर इलाज मिल सकेगा। इसके लिए यहां डाॅक्टरों की टीम के साथ पूरा सेटअप होगा। छह डाॅक्टर सहित 73 मेडिकल स्टाफ की यहां तैनाती होगी।
बता दें कि अभी हादसों में घायलों के लिए कैजुअल्टी में इलाज की व्यवस्था है। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें मेन वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। ट्राॅमा यूनिट बनने के बाद इसकी नौबत नहीं आएगी। एक ओटी सहित यूनिट में दस बेड का अलग से वार्ड होगा, जिसमें 5 बेड का एक आधुनिक आईसीयू रहेगा।
यहां बता दें कि सरगुजा जिले में रह साल औसत 300 सड़क हादसे होते हैं और 150 के करीब मौतें होती है। ट्राॅमा यूनिट बनने के बाद मौतों के आंकड़ों में कमी आने की संभावना रहेगा।
हालांकि बनने वाले थ्री लेवल ट्राॅमा यूनिट में न्यूरो सर्जन की नियुक्ति नहीं होगी। न्यूरो सर्जन के लिए सेकंड लेवल के ट्राॅमा यूनिट में शासन से पद स्वीकृत होता है। सीजीएमएससी के कार्यपालन यंत्री मृत्यूंजय साहू ने बताया कि जनवरी तक ट्राॅमा यूनिट का भवन तैयार हो जाएगा। इसका काम शुरू हो गया है।
ट्राॅमा यूनिट में 6 विशेषज्ञ समेत 73 का होगा स्टाफ
थ्री लेवल ट्राॅमा यूनिट के लिए छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति होगी। इसमें निश्चेतना विशेषज्ञ के दो, ऑर्थो सर्जन और जनरल सर्जरी के 2 विशेषज्ञ डॉक्टर होंगे। इसके अलावा 6 मेडिकल ऑफिसर, 25 नर्सिंग स्टाफ, 13 नर्सिंग असिस्टेंट, ओटी टेक्नीशियन, रेडियोग्राफर सहित अन्य मेडिकल स्टाफ की यहां नियुक्ति होगी।
थ्री लेवल ट्राॅमा यूनिट में लगेंगे ये उपकरण
अल्ट्रा सोनोग्राफी, 500 एमए एक्स-रे मशीन विथ सीआर सिस्टम, 100 एमए पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर सहित अन्य उपकरण यहां अलग से लगेंगे, ताकि ओटी में ही घायलों का ऑपरेशन कर इलाज हो सके।