फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज और इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। इन सभी नेताओं ने पहले कीव के उन हिस्सों का दौरा किया, जहां रूस ने जबरदस्त हमले किए हैं। इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की के साथ लंबी मीटिंग की। इसके बाद यह तय हुआ कि नाटो यूक्रेन को बहुत जल्द बड़ी मदद देगा। हालांकि, यह किस शक्ल में होगी, इसका खुलासा फिलहाल नहीं किया गया।‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाटो देश बहुत जल्द यूक्रेन की उस मांग को पूरा कर सकते हैं, जिसमें उसने रूस से मुकाबले के लिए भारी हथियारों की मांग की थी। अप्रैल में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन भी कीव गए थे। माना जा रहा है कि नाटो देश सबसे पहले यूक्रेन को 6 ट्रक से दागे जाने वाली स्पेशल हॉवित्जर यूनिट दे सकते हैं। फ्रांस इसकी 12 यूनिट पहले ही यूक्रेन को दे चुका है। रूस इन मिसाइलों के हमले से परेशान है और इसकी वजह से उसे दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन पर कब्जा छोड़ना पड़ा।
कीव में मीडिया से बातचीत के दौरान मैक्रों ने कहा- हमने यहां आकर जमीनी हालात का जायजा लिया है। यूक्रेन अपने वजूद की जंग लड़ रहा है। उसकी आजादी और वजूद को बचाने की िजम्मेदारी हमारी भी है। यही हमारा टारगेट है और इसे हासिल करने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है।
एक सवाल के जवाब में मैक्रों ने कहा- यूक्रेन को यूरोपीय यूनियन की मेंबरशिप दिलाने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसके लिए नियम हैं और हम कोशिश कर रहे हैं कि जितनी जल्दी हो सके, यूक्रेन को पहले यूरोपीय यूनियन की मेंबरशिप दिलाई जाए।रूस ने यूक्रेन के पूर्वी राज्य लिसिचांस्क पर जबरदस्त हमले जारी रखे हैं। सेवेरोडोनेट्स्क यहां का अहम शहर है। रूसी फौज ने इस शहर तक जाने वाले तमाम ब्रिज उड़ा दिए हैं। अब यहां के लोग खेतों और नहरों के जरिए यहां से भागने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कुछ ट्रेन रूट्स भी खुले हैं। खास बात यह है कि रूसी फौज तीन दिन से 18 किलोमीटर दूर अटकी हुई है। यूक्रेन की फौज उसका पूरी ताकत से मुकाबला कर रही है।