कम बरसात की वजह से सूखे के खतरे से जूझ रहे सरगुजा के जिलों में फसल नुकसान के सर्वेक्षण का निर्देश हुआ है। कांग्रेस विधायकों की मांग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को यह निर्देश जारी किया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मुख्य सचिव अमिताभ जैन आज ही कलेक्टरों से चर्चा करने वाले हैं।
सरगुजा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और विधायक बृहस्पत सिंह ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा था। इस पत्र पर कुनकुरी विधायक यूडी मिंज और भरतपुर-सोनहत विधायक गुलाब कमरो के भी हस्ताक्षर हैं। इस पत्र में कहा गया कि सरगुजा संभाग के तीन जिलों बलरामपुर, जशपुर और अंबिकापुर में बहुत कम वर्षा हुई है। किसानों की फसल खेतों में ही सूख चुकी है। विधायकों ने तीनों जिलों को सूखा प्रभावित घोषित कर फसलों का मुआवजा देने की मांग की थी। उनकी मांग है कि गांवाें में रोजगार पैदा करने वाले और राहत पहुंचाने वाले काम भी शुरू कराए जाएं।
उनकी मांग के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरगुजा संभाग में कम वर्षा की वजह से होने वाले नुकसान के नजरी सर्वेक्षण का निर्देश दिया है। इस सर्वेक्षण के बाद फसलों को होने वाले नुकसान की एक शुरुआती तस्वीर सामने आएगी। सरकार कुछ तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित कर राहत कार्य शुरू कर सकती है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक जून से 31 जुलाई तक छत्तीसगढ़ में 579.2 मिलीमीटर तक बरसात हो चुकी है। यह सामान्य औसत 569 मिमी से 2% अधिक है। इस बीच सरगुजा संभाग के तीन जिले सबसे सूखे रह गए हैं। अंबिकापुर में सामान्य औसत बरसात 645.9 मिमी से 65% कम पानी गिरा है। वहां इन दो महीनों में केवल 229.2 मिमी पानी गिरा है। जशपुर में 275.8 और बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 207.4 मिमी पानी ही बरसा है। यह सामान्य से 63% कम है।