मुंबई के पात्रा चॉल घोटाले में रविवार को गिरफ्तार किए गए शिवसेना सांसद संजय राउत की कस्टडी सोमवार तक बढ़ा दी गई है। संजय रविवार से ED की गिरफ्त में हैं। अब उनकी पत्नी वर्षा राउत को भी नोटिस भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो ED दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर सकती है।
इससे पहले, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने संजय राउत से पूछा- आपको कोई दिक्कत है क्या? राउत ने कहा- जहां कस्टडी में रखा वहां वेंटिलेशन नहीं है। उन्होंने पंखे की मांग की। ED ने कोर्ट में कहा कि हमने उनको AC में रखा है, संजय राउत झूठ बोल रहे हैं।
ED ने वेंटिलेशन वाला रूम उपलब्ध कराने की बात कही और कहा कि इनके और परिवार के अकाउंट में 1 करोड़ 6 लाख कैसे आए और विदेश दौरे पर कितना खर्च किया, उसकी जांच कर रहे हैं। हमको रेड में कुछ कागजात मिले हैं, जिससे पता चलता है कि राउत को हर महीने प्रवीण द्वारा एक निश्चित रकम दी जाती थी।
राउत के वकील ने कहा- वर्षा राउत के अलीबाग प्लॉट को लेकर सभी कागज पत्र ED को पहले ही दिए जा चुके हैं। स्वप्ना पाटकर के वकील ने कहा कि संजय द्वारा स्वप्ना पाटकर को धमकाया जा रहा है। जज ने कहा जब संजय राउत गिरफ्तार हैं, तो धमका कौन रहा है।पात्रा चॉल घोटाले की जांच कर रही ED ने कोर्ट को बताया कि संजय राउत ने 10 प्लॉट खरीदने के लिए 3 करोड़ रुपए कैश दिए थे। संजय राउत को ये कैश प्रवीण राउत की ओर से मिला था। संजय राउत के लिए प्रवीण ‘फ्रंटमैन’ की तरह थे। वो संजय राउत को हर महीने लाखों रुपए कैश भी भेजते थे। इसी 3 करोड़ के नए खुलासे के आधार पर ED जमानत का विरोध किया। जज ने जमानत याचिका रद्द करते हुए सोमवार तक कस्टडी बढ़ा दी है।इधर, सूत्रों ने बताया कि रविवार को संजय राउत के घर की तलाशी के दौरान ED को साढ़े ग्यारह लाख रुपए नकद मिले हैं। राउत या उनके परिवार के लोग इस रकम का सोर्स नहीं बता सके हैं। ED ने इस रिकवरी को अपनी जांच में दर्ज कर लिया है। पात्रा चॉल घोटाला 1,043 करोड़ रुपए का है। राउत इस केस में आरोपी हैं।
यह मामला मुंबई के गोरेगांव इलाके में पात्रा चॉल से जुड़ा है। यह महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवेलपमेंट अथॉरिटी का भूखंड है। इसमें करीब 1,034 करोड़ का घोटाला होने का आरोप है। इस केस में संजय राउत की नौ करोड़ रुपए और राउत की पत्नी वर्षा की दो करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त हो चुकी है।
आरोप है कि रियल एस्टेट कारोबारी प्रवीण राउत ने पात्रा चॉल में रह रहे लोगों से धोखा किया। एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस भूखंड पर 3,000 फ्लैट बनाने का काम मिला था। इनमें से 672 फ्लैट पहले से यहां रहने वालों को देने थे। शेष MHADA और उक्त कंपनी को दिए जाने थे, लेकिन साल 2011 में इस विशाल भूखंड के कुछ हिस्सों को दूसरे बिल्डरों को बेच दिया गया था।ED की जांच में सामने आया है कि MHADA की जमीन की FSI को अनधिकृत तरीके से लेने के बाद गुरु आशीष कंपनी ने तेजी से इसे 16 अन्य बिल्डर्स को बेचा। प्रवीण राउत इसी कंपनी में एक डायरेक्टर थे। इससे गुरु आशीष कंपनी को एक बड़ा आर्थिक मुनाफा हुआ। हालांकि, यह प्रोजेक्ट अभी तक सिर्फ 10 प्रतिशत ही तैयार हुआ है। इसे पूरा करने के लिए गुरु आशीष कंपनी को एक बड़ा अमाउंट चाहिए, लेकिन वह अब दिवालिया घोषित होने की प्रक्रिया में है।