कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह से एक शादीशुदा बेटा माता-पिता का बेटा होता है, उसी तरह एक शादीशुदा बेटी भी बेटी ही होती है। हाई कोर्ट ने सैनिक कल्याण बोर्ड के उस दिशा-निर्देश को खारिज करते हुए ये बात कही, जिसमें विवाहित बेटियों को पूर्व सैनिकों के आश्रित कार्ड का लाभ उठाने से रोक दिया गया था। लेकिन अब हाई कोर्ट ने इस दिशा-निर्देश को खारिज कर दिया है।
जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा कि जब शादी के बाद बेटे की स्थिति में बदलाव नहीं आता, तो बेटी की स्थिति में भी नहीं आ सकता। ये दिशा निर्देश लैंगिक रूढ़िवादिता का उदाहरण है, जो दशकों पहले अस्तित्व में था। अगर इस दिशा निर्देश को बने रहने की अनुमति दी जाती है तो यह महिलाओं की समानता में बाधा पैदा करेगा। कोर्ट ने कहा कि लिंग के आधार पर भेदभाव संविधान के अनुच्छेद-14 समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता बेटी को कल्याणकारी योजनाओं में महज इसलिए दूर रखा गया, क्योंकि वह शादीशुदा है।