संसद में मोदी बोले- कांग्रेस की बर्बादी पर रिसर्च तय:राहुल बोले- वे अपने दोस्त को बचा रहे

संसद में मोदी बोले- कांग्रेस की बर्बादी पर रिसर्च तय:राहुल बोले- वे अपने दोस्त को बचा रहे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब दिया। अपने 85 मिनट के भाषण में उन्होंने राहुल गांधी के अडाणी पर पूछे किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। मोदी की पूरी स्पीच में अडाणी का जिक्र तक नहीं था। हालांकि PM विपक्ष की एकता से लेकर राहुल की भारत जोड़ो यात्रा पर तंज जरूर कसते रहे।

मोदी के भाषण के बाद राहुल गांधी ने कहा- PM ने मेरे एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उनके बयान से समझ आ गया है कि वे अडाणी को बचा रहे हैं। इसके पीछे कई सारे कारण हैं। मैं संतुष्ट नहीं हूं, लेकिन इससे सच्चाई उजागर हो रही है। राहुल ने ट्वीट भी किया- न जांच कराएंगे, न जवाब देंगे – प्रधानमंत्री जी बस अपने ‘मित्र’ का साथ देंगे।

राहुल गांधी पर मोदी के तीन कटाक्ष

1. कल कुछ लोगों के भाषण के बाद पूरा इको सिस्टम उछल रहा था। समर्थक खुश होकर कह रहे थे कि ये हुई ना बात। नींद भी अच्छी आई होगी, उठ भी नहीं पाए होंगे। ऐसे लोगों के लिए कहा गया है- ये कह-कहकर हम दिल को बहला रहे हैं, वो अब चल चुके हैं, वो अब आ रहे हैं।

2. राष्ट्रपति के भाषण से कुछ सदस्य कन्नी काट गए। एक बड़े नेता राष्ट्रपति जी का अपमान भी कर चुके हैं। जनजातीय समुदाय के प्रति नफरत भी दिखाई दी है। टीवी पर उनके बयानों से भीतर पड़ा हुआ नफरत का भाव बाहर आ गया। बाद में चिट्ठी लिखकर बचने की कोशिश की गई।

3. कई सदस्यों ने सदन में तर्क और आंकड़े दिए। अपनी रुचि, प्रवृत्ति और प्रकृति के अनुसार बातें रखीं। इससे उनकी क्षमता, योग्यता और समझ का पता लगता है। इससे पता चलता है कि किसका क्या इरादा है, देश भी इसका मूल्यांकन करता है।

भारत जोड़ो यात्रा पर PM के तीन बयान

1. जो अभी-अभी जम्मू-कश्मीर से घूमकर आए हैं, उन्होंने देखा होगा कि कितने आन-बान-शान के साथ वहां जा सकते हैं। पिछली शताब्दी में मैं भी जम्मू-कश्मीर में यात्रा लेकर गया था और लाल चौक में तिरंगा फहराने का संकल्प लेकर गया था। लाल चौक में तिरंगा फहराकर मैंने कहा था- आमतौर पर 15 अगस्त और 26 जनवरी को तिरंगा लहराता है तो भारत का आयुध और बारूद सलामी देता है। आज जब लाल चौक पर तिरंगा फहराया है, तो दुश्मन देश का बारूद सलामी दे रहा है।

2. समय सिद्ध कर रहा है कि जो यहां (सत्ता में) बैठते थे, वो वहां (विपक्ष में) जाने के बाद भी फेल हो गए। देश पास होता जा रहा है डिस्टिंक्शन पर। समय की मांग है कि आज निराशा में डूबे लोग स्वस्थ मन रखकर आत्मचिंतन करें।

3. तिरंगे से कुछ लोगों को शांति बिगड़ने का खतरा लगता था। वक्त देखिए और वक्त का मजा देखिए, अब वो भी तिरंगा यात्रा में शरीक हो गए। कुछ लोग टीवी में चमकने की कोशिश में लगे थे, उसी समय श्रीनगर में दशकों बाद थिएटर हाउसफुल चल रहे थे। आज हम सैकड़ों की तादाद में जम्मू-कश्मीर जा सकते हैं। कई दशकों के बाद पर्यटन के कई रिकॉर्ड टूटे हैं।

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