चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने आम आदमी पार्टी- कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को मेयर घोषित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तरफ से घोषित बीजेपी कैंडिडेट मनोज कुमार सोनकर को मेयर के तौर पर विजेता घोषित करने का फैसला अवैध है और उसे खारिज किया जाता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पूरे चुनावी प्रक्रिया को खारिज करने से लोकतांत्रिक सिद्धांत के लिए विनाशकारी होगा क्योंकि यह सब पीठासीन अधिकारी के मिसकंडक्ट के कारण हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीठासीन अधिकारी मसीह ने जानबूझकर आठ बैलेट पेपर को विकृत किया है उनके खिलाफ मुकदमा चलाए जाने के लिए नोटिस जारी किया है।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अनुच्छेद-142 के तहत विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए आदेश पारित करते हुए कहा कि पूर्ण न्याय के लिए हम निर्देश जारी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बैलेट पेपर और विडियो रेकॉर्डिंग पेश करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस और चीफ जस्टिस ने बैलेट पेपर और वीडियो का अवलोकन किया और खुद ही परीक्षण किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्होंने बैलेट पेपर का परीक्षण किया है और पाया है कि वह विकृत नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जो रिजल्ट शीट है उसमें 12 वोट याचिकाकर्ता कुलदीप को मिले हैं जबकि 16 वोट बीजेपी कैंडिडेट मनोज सोनकर को मिले थे और 8 बैलेट पेपर को पीठासीन अधिकारी ने अमान्य करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इन आठ बैलेट को मान्य करार दिया और कहा कि इनमें वोट कुलदीप कुमार के फेवर में पड़े थे। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह से कुलदीप कुमार को कुल 20 वोट मिले हैं और उन्हें मेयर पद पर विजेता घोषित किया जाता है।