देश में 18वीं लोकसभा के लिए करीब ढाई महीने तक चले चुनाव के सातवें और आखिरी चरण में शनिवार को होने वाले मतदान पर सभी की निगाहें केंद्रित हैं। चुनाव आयोग इसकी पूरी तैयारी कर चुका है। आठ राज्य व केंद्र शासित प्रदेश की 57 संसदीय सीटों पर होने वाले मतदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 904 प्रत्याशियों का फैसला होगा। इस चरण की में सामान्य श्रेणी की 41, अनुसूचित जनजाति की तीन और अनुसूचित जाति की 13 सीटें हैं। इसके साथ ही ओडिशा विधानसभा के चौथे एवं अंतिम चरण के लिए 42 सीट पर मतदान जारी है।मतदान पूरा होने के साथ ही शाम 6.30 बजे के बाद एग्जिट पोल के नतीजों से अनुमानों का बाजार सजने लगेगा। टीवी चैनल, विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से बताएंगे कि कौनसा दल या गठबंधन अगली सरकार बना सकता है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर से एग्जिट पोल वास्तविक नतीजों के आसपास कितना ठहरते हैं? सवाल ये भी ऐसे एग्जिट पोल का आधार क्या होता है! लगभग 96 करोड़ मतदाताओं में से चंद हजार मतदाताओं की रायशुमारी के आधार पर क्या सटीक नतीजों का पूर्वानुमान लगाना संभव है। पिछले ढाई दशक में अनेक ऐसे मौके आए हैं जब अनुमानों का ये बाजार औंधे मुंह गिरा है। कांग्रेस ने कहा कि इस बार एग्जिट वोट को लेकर टीवी चैनलों पर होने वाली बहसों में वह हिस्सा नहीं लेगी। क्योंकि, ऐसी बहसें चैनलों के टीआरपी बढ़ाने का तरीका है।