नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ संशोधन कानून के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है। हालांकि, कोर्ट ने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कानून में किए गए तीन बड़े बदलावों पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगाई है।
मुख्य बदलाव और कोर्ट का आदेश:
- गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या: सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि केंद्रीय वक्फ बोर्ड में अधिकतम 4 और राज्य वक्फ बोर्ड में अधिकतम 3 गैर-मुस्लिम सदस्य ही हो सकते हैं। पहले इसकी कोई सीमा नहीं थी। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि बोर्ड में सरकारी सदस्य भी मुस्लिम समुदाय से हों।
- CEO की नियुक्ति: राज्य बोर्ड का CEO (पदेन सचिव) जहां तक संभव हो, मुस्लिम समुदाय से ही नियुक्त किया जाए।
- वक्फ बनाने की शर्त: कानून के उस प्रावधान पर रोक लगा दी गई है, जिसमें किसी व्यक्ति को वक्फ बनाने के लिए कम से कम 5 साल से मुसलमान होना जरूरी था। कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकार नियम नहीं बनाती, यह प्रावधान मनमाना है।
- वक्फ संपत्ति का सत्यापन: कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को वक्फ संपत्तियों की स्थिति तय करने के अधिकार वाले प्रावधानों पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को नागरिकों के अधिकार तय करने का अधिकार देना ‘सेपरेशन ऑफ पावर्स‘ के सिद्धांत के खिलाफ है।
- वक्फ के रजिस्ट्रेशन: सुप्रीम कोर्ट ने इस अनिवार्य प्रावधान में दखल देने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह 1995 और 2013 के कानूनों में भी मौजूद था।