प्रशासनिक सुधार विभाग का साइबर सुरक्षा पर बड़ा कदम: डिजिटल सुरक्षा बुनियादी ढांचा मजबूत करने की तैयारी

प्रशासनिक सुधार विभाग का साइबर सुरक्षा पर बड़ा कदम: डिजिटल सुरक्षा बुनियादी ढांचा मजबूत करने की तैयारी

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने अपनी ई-गवर्नेंस प्रणालियों को अभेद्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने 8 अक्टूबर को सीएसओआई में एक साइबर सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका स्पष्ट लक्ष्य सार्वजनिक प्रशासन के कर्मचारियों के बीच जागरूकता बढ़ाना और देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे में साइबर लचीलेपन को मजबूत करना था।

यह कार्यशाला विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) की पहलों, खासकर साइबर स्वच्छता केंद्र और विशेष अभियान 5.0 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थी।

वरिष्ठ अधिकारियों ने निम्नलिखित प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों पर प्रकाश डाला:

  1. डेटा का जिम्मेदार उपयोग: एमईआईटीवाई सचिव श्री एस. कृष्णन ने स्वच्छ और सुरक्षित साइबर वातावरण के लिए डेटा का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
  2. सक्रिय लचीलापन (Proactive Resilience): सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने बताया कि साइबर लचीलापन केवल खतरों से उबरना नहीं है, बल्कि उनका पूर्वानुमान लगाना और उनके लिए विकसित होना भी है।
  3. ई-ऑफिस का अनुकूलन: डीएआरपीजी सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने ई-ऑफिस की सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने के लिए विशिष्ट उपायों पर बल दिया, जैसे:
    • वीपीएन के उपयोग की समीक्षा करना।
    • गैर-उपयोगकर्ताओं की पहचान कर निष्क्रिय खातों को बंद करना।
    • सभी ई-फाइलों पर डिजिटल हस्ताक्षर को अनिवार्य बनाना।

कुल मिलाकर, कार्यशाला ने इस बात को रेखांकित किया कि सरकारी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण (ई-ऑफिस, भविष्य, सीपीग्राम्स) को सफल बनाने के लिए सरल साइबर स्वच्छता नियम (जैसे सुरक्षित पासवर्ड और लिंक सत्यापन) और तकनीकी सुरक्षा उपाय (जैसे एन्क्रिप्शन और मजबूत प्रमाणीकरण) को समन्वित तरीके से लागू करना अनिवार्य है।

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