मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों के सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार का लक्ष्य युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, और इसीलिए इस वर्ष को “निवेश और रोजगार वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना’ ने हजारों युवाओं को उद्योग शुरू करने का हौसला दिया है और अब वे रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि ‘रोजगार देने वाले’ बन रहे हैं। उन्होंने MSME को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया जो देश की जीडीपी में 30% और निर्यात में 45% योगदान करते हैं।
इस अवसर पर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘सिंगल क्लिक’ के माध्यम से 700 MSME इकाइयों को ₹197 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन सहायता राशि वितरित की। उन्होंने नवीन स्टार्टअप नीति के तहत 63 स्टार्टअप्स को ₹1.20 लाख प्रति स्टार्टअप की दर से कुल ₹1 करोड़ से अधिक की सहायता राशि के चेक भी प्रदान किए।
मुख्य वितरण:
- MSME प्रोत्साहन सहायता: 700 इकाइयों को ₹197 करोड़ से अधिक।
- बैंक ऋण सहायता (उद्यम क्रांति योजना): 5084 युवाओं को ₹347 करोड़ से अधिक।
- भू-आवंटन: 237 MSME उद्यमियों को औद्योगिक स्थापना के लिए भू-आवंटन पत्र दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश ‘स्टार्टअप इंडिया’ के विजन को साकार करने में अग्रणी है, जहाँ 6,000 से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं, जिनमें से 47% का नेतृत्व महिलाएँ कर रही हैं। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मंत्र को साकार करने के लिए MSME क्षेत्र की शक्ति पर जोर दिया।
MSME मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि मध्य प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है जहाँ इतनी तेज़ी से प्रोत्साहन राशि वितरित की जा रही है।