साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बाद अब केंद्रीय एजेंसियों के 12 लाख से अधिक कर्मचारी भी जोहो मेल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो गए हैं। सरकार ने यह फैसला साइबर खतरों से बचाव और डेटा को सुरक्षित रखने के लिए लिया है।
जोहो मेल क्यों?
यह फैसला 2022 में एम्स सर्वर हैक होने की घटना के बाद लिया गया। इस हैकिंग के कारण सरकार को स्वदेशी और सुरक्षित संचार माध्यम की सख्त जरूरत महसूस हुई। तीन साल की खोजबीन और जांच के बाद, 2023 में जोहो मेल को यह टेंडर मिला। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों (जैसे NIC और CERT-In) ने जोहो मेल की सुरक्षा का कड़ा ऑडिट किया और संतुष्ट होने पर इसे अपनाया गया।
जोहो कॉर्पोरेशन
जोहो मेल भारतीय मल्टीनेशनल कंपनी जोहो कॉर्पोरेशन का उत्पाद है, जिसकी स्थापना 1996 में श्रीधर वेम्बु ने की थी। यह चेन्नई में स्थित है और यह एक बूटस्ट्रैप्ड (बिना बाहरी निवेश वाली) कंपनी है, जो 160 देशों में क्लाउड-आधारित सॉफ्टवेयर सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी दावा करती है कि उनका मेल एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ डेटा को सुरक्षित रखता है और व्यक्तिगत डेटा को विज्ञापन के लिए इस्तेमाल नहीं करता। जोहो ने ‘अरट्टई’ नाम से वॉट्सऐप का एक स्वदेशी विकल्प भी लॉन्च किया है।