प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर गुजरात के नर्मदा जिले से देश को संबोधित करते हुए जनजातीय वीरों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में इन जननायकों ने अपना लहू बहाया, लेकिन उनके योगदान को पहले की सरकारों और इतिहासकारों ने नकार दिया था। अब सरकार का लक्ष्य नई पीढ़ी को इन अतुलनीय बलिदानों से अवगत कराना है। 15 नवंबर को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन को इस दिवस के रूप में मनाना इसी का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय वर्ग को विकास की मुख्य धारा से जोड़ रही है, जिसके तहत अटल जी की सरकार में जनजातीय कल्याण मंत्रालय बना था। उन्होंने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के लिए ₹18,000 करोड़ से अधिक खर्च करने और सिकल सेल एनीमिया की 6 करोड़ स्क्रीनिंग का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि आज देश की राष्ट्रपति और कई राज्यों के मुख्यमंत्री इसी समुदाय से आते हैं।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपनी संस्कृति और गौमाता की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी और मात्र 25 वर्ष की आयु में बलिदान दिया। उन्होंने रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, खाज्या नायक जैसे अन्य जनजातीय नायकों के संघर्षों का भी ज़िक्र किया।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय भाई-बहनों के कल्याण के लिए ₹662 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी और जनजातीय योजनाओं की जानकारी के लिए “शालिनी ऐप” लॉन्च किया। उन्होंने घोषणा की कि सभी कन्या छात्रावासों का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती और बालक छात्रावासों का नाम महाराजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के नाम पर रखा जाएगा। साथ ही, उन्होंने 2026 में 5 हजार छात्रावास अधीक्षकों की भर्ती की भी घोषणा की। इस दौरान, महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ सहित कई जनजातीय प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।