प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष से संसद को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष बिहार चुनावों में मिली हार के कारण बेचैन नज़र आ रहा है।
उन्होंने सभी सांसदों से मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का अनुरोध किया। उन्होंने टिप्पणी की, “ड्रामा करने के लिए बहुत जगह है, जिसे ड्रामा करना है करे। यहां (संसद में) ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।“
इस पर विपक्ष की ओर से त्वरित प्रतिक्रियाएं आईं। प्रियंका गांधी ने कहा कि मुद्दे उठाना ड्रामा नहीं है, संसद इसीलिए है। वहीं, अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि सबको पता है कि ड्रामा कौन करता है।
पीएम के भाषण की 3 प्रमुख बातें:
- सकारात्मक सोच जरूरी: पीएम ने कहा कि राजनीति में नकारात्मकता काम कर सकती है, लेकिन राष्ट्र-निर्माण के लिए सकारात्मक सोच आवश्यक है। विपक्ष को चुनावी हार की हताशा को छोड़कर राष्ट्र-निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।
- लोकतंत्र की ताकत: उन्होंने बिहार चुनाव में मतदान की तेजी और महिलाओं की भागीदारी को लोकतंत्र की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने सिद्ध कर दिया है कि ‘डेमोक्रेसी कैन डिलीवर’।
- हार की बेचैनी: प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर चुनावी पराजय से बेचैन होने और हार को पचा न पाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने संसद को या तो चुनावों का ‘वार्म-अप एरीना’ या हार के बाद हताशा निकालने का मंच बना दिया है।
पीएम ने यह भी कहा कि अगर विपक्ष चाहे तो वह उन्हें ‘परफॉर्म’ करने के टिप्स देने के लिए तैयार हैं, ताकि यह सत्र हार की हताशा या जीत के अहंकार का अखाड़ा न बने।