केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नई दिल्ली में आयोजित पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) के तहत गठित पर्यटन उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स की चौथी बैठक का नेतृत्व किया। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा समेत त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों ने बैठक में भाग लिया।
कार्य-उन्मुख खाका तैयार करने की दिशा में कदम: यह बैठक पिछली तीन चर्चाओं पर आधारित थी और पूर्वोत्तर की पर्यटन क्षमता को सामने लाने के लिए निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर केंद्रित थी:
- कनेक्टिविटी: बहु-मोडल संपर्क को बढ़ावा देना।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर: विश्व स्तरीय पर्यटन ढांचे को मज़बूत करना।
- मार्केटिंग: प्रतिष्ठित स्थलों का विकास और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग।
- स्थिरता: साहसिक, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और क्षेत्र की संस्कृति, प्रकृति व विरासत से जुड़े पर्यटन उत्पादों का विस्तार।
क्षमता निर्माण और निवेश पर ज़ोर: टास्क फोर्स ने दो प्रमुख क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया:
- कौशल विकास: स्थानीय रोज़गार सृजन और उद्योग के सतत् विकास के लिए कौशल व्यवस्था को आधुनिक बनाना और क्षमता निर्माण को गहन करना।
- निवेश प्रोत्साहन: पूर्वोत्तर भारत को एक प्रीमियम पर्यटन क्षेत्र के रूप में एकीकृत ब्रांडिंग करना, ताकि निजी निवेश आकर्षित हो सके और एक निवेशक-अनुकूल नीतिगत माहौल बनाया जा सके।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया के मुख्य निर्देश:
“पूर्वोत्तर में भारत के सांस्कृतिक और प्राकृतिक केंद्र के रूप में उभरने की अपार क्षमता है। हमें अंतिम-मील संपर्क, एकीकृत योजना और समुदायों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”
- सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर के सभी प्रमुख त्योहारों का एक वार्षिक कैलेंडर विकसित किया जाए।
- पूरे क्षेत्र में निर्बाध पर्यटन सर्किट प्रदान करने के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय आवश्यक है।
आगे की योजना: सभी प्रतिभागियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद, केंद्रीय मंत्री ने मेघालय सरकार को निर्देश दिया कि वह बैठक में दिए गए सुझावों को शामिल कर अंतिम उच्च-स्तरीय कार्यबल रिपोर्ट तैयार करे।