नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने भारत की उस अदम्य सभ्यतागत शक्ति का स्मरण किया, जिसने सदियों के आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ की गरिमा को जीवित रखा है।
इतिहास और संकल्प की गाथा: प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि उसके बाद कई शताब्दियों तक बार-बार आक्रमण हुए, लेकिन भक्तों की आस्था और भारत के सांस्कृतिक संकल्प ने हर बार मंदिर का पुनर्निर्माण सुनिश्चित किया। पीएम मोदी के अनुसार, यह पर्व उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्वजों को याद करने का है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।
ऐतिहासिक कड़ियों का स्मरण: प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर 2001 के उस विशेष कार्यक्रम को याद किया, जब मंदिर के पुनर्निर्माण (1951) के 50 वर्ष पूरे हुए थे। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और के.एम. मुंशी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि 2001 के उस उत्सव में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी भी उपस्थित थे। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2026 में 1951 के उस भव्य समारोह की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी।