नई दिल्ली: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के पांच वर्ष पूरे होने के साथ ही भारत ने शैक्षिक सुधारों के एक नए चरण में प्रवेश कर लिया है। ‘समग्र शिक्षा 3.0’ के लिए आयोजित परामर्श बैठक में शासन, बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र अधिकारों जैसे मुख्य स्तंभों पर गहन चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि नई योजना का उद्देश्य शिक्षा को परिणामोन्मुख, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और भारतीय मूल्यों में निहित बनाना है।
अपर सचिव धीरज साहू ने अपनी प्रस्तुति में आगामी वर्षों के लिए निर्धारित लक्ष्यों को साझा किया, जिसमें मुख्य फोकस पहुंच (Access), समानता (Equity) और गुणवत्ता (Quality) पर रहा। बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक की शिक्षा को बिना किसी खंडन के एकीकृत किया जाएगा। जयंत चौधरी ने व्यावसायिक मार्गों और डिजिटल अधिगम (Digital Learning) को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने की बात कही, जिससे विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र न रहकर समाज में बदलाव के प्रमुख कारक बनें।