विकसित भारत की संकल्पना और सांस्कृतिक गौरव: संसद में राष्ट्रपति का दूरदर्शी संबोधन

विकसित भारत की संकल्पना और सांस्कृतिक गौरव: संसद में राष्ट्रपति का दूरदर्शी संबोधन

नई दिल्ली: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2026 के संसदीय सत्र के संयुक्त संबोधन में राष्ट्र के विकास का एक व्यापक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं वर्षगांठ और ‘वंदे मातरम्’ के महत्व से की। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत अब अपनी सदी के दूसरे पड़ाव पर है और 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

सामाजिक न्याय पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि ‘जल जीवन मिशन’ के तहत 12.5 करोड़ परिवारों को पानी और 4 करोड़ गरीबों को पक्के घर दिए गए हैं। राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सुखद आंकड़े साझा किए, जिसमें भारत का दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनना और स्मार्टफोन निर्यात में 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना शामिल है।

रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के विषय पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और माओवाद के खात्मे का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि माओवादी हिंसा अब केवल 8 जिलों तक सिमट गई है। अंत में, उन्होंने सभी सांसदों से राष्ट्रहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया।

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