नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर पड़ा है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापू राममोहन नायडू ने सोमवार को लोकसभा में बजट सत्र के दौरान इस गंभीर स्थिति पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने सदन को बताया कि सुरक्षा कारणों और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों के एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) बंद होने के कारण अब तक हजारों उड़ानों को निरस्त करना पड़ा है।
उड़ानों और यात्रियों का सांख्यिकीय विवरण: मंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारतीय एयरलाइंस ने कुल 4,335 उड़ानें रद्द की हैं, जबकि विदेशी ऑपरेटरों ने लगभग 1,187 उड़ानों को अपनी सूची से हटाया है। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद उड्डयन क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह नहीं रुकी है। मंत्री ने बताया कि इस तनावपूर्ण अवधि के दौरान भी 2,19,780 यात्रियों ने हवाई यात्रा की, जो संकट के समय में भी कनेक्टिविटी बनाए रखने के प्रयासों को दर्शाता है।
सुरक्षा और निगरानी तंत्र: राममोहन नायडू ने जोर देकर कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि “जब किसी क्षेत्र का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया जाता है, तो वहां विमानों का संचालन तकनीकी और सुरक्षा की दृष्टि से असंभव होता है।” भारत का विमानन नियामक, नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA), और मंत्रालय लगातार उन देशों के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं जहां प्रतिबंध लागू हैं। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी और एयरस्पेस खुलेगा, सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल कर दिया जाएगा।