पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों का मुख्य कारण ईंधन की कमी नहीं, बल्कि ‘पैनिक बाइंग’ (डर के कारण अधिक खरीदारी) है। खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में ईंधन की सामान्य खपत लगभग 18548 KL प्रतिदिन है, जो अफवाहों के चलते बढ़कर 2 से 2.5 गुना तक पहुँच गई है।
प्रमुख तथ्य और सरकारी कदम:
- नियमित आपूर्ति: ऑयल कंपनियों के पास रोजाना नया स्टॉक पहुँच रहा है, जिससे भविष्य की मांग को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
- बॉटलिंग प्लांट: एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति के लिए बॉटलिंग प्लांटों में काम के घंटे बढ़ा दिए गए हैं।
- मंत्री की अपील: श्री गोविंद सिंह राजपूत ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे आवश्यकतानुसार ही ईंधन खरीदें और अनावश्यक भंडारण न करें।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पेट्रोलियम पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।