टेक्सटाइल ब्रांड ‘रेमंड’ को देशभर में पहचान दिलाने वाले पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का रविवार, 29 मार्च को मुंबई में अंतिम संस्कार किया गया। दोपहर करीब 3 बजे चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर उनके बेटे और रेमंड के वर्तमान चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने परिवार के अन्य सदस्यों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं।
87 वर्षीय विजयपत सिंघानिया का निधन शनिवार शाम को हुआ था। उनके परिवार में पत्नी आशादेवी और तीन बच्चे—मधुपति सिंघानिया, शेफाली रुइया और गौतम सिंघानिया शामिल हैं। गौतम सिंघानिया ने अपने संदेश में अपने पिता को एक दूरदर्शी नेता और समाजसेवी बताया, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
विजयपत सिंघानिया ने वर्ष 1980 में रेमंड ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभाला था। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कपड़ा उद्योग से आगे बढ़कर सिंथेटिक फैब्रिक्स, डेनिम, स्टील, इंडस्ट्रियल फाइल्स और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। उनके विजन के चलते रेमंड एक साधारण टेक्सटाइल कंपनी से विकसित होकर एक बहुआयामी औद्योगिक समूह बन गया।
व्यापार के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे वर्ष 2007 से 2012 तक आईआईएम अहमदाबाद की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन रहे।
विजयपत सिंघानिया अपने साहसिक व्यक्तित्व और एविएशन के प्रति रुचि के लिए भी जाने जाते थे। नवंबर 2005 में 67 वर्ष की आयु में उन्होंने हॉट एयर बैलून के जरिए लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था।
इससे पहले वर्ष 1988 में उन्होंने माइक्रोलाइट विमान से लंदन से नई दिल्ली तक 23 दिनों में अकेले उड़ान भरते हुए ‘स्पीड-ओवर-टाइम एंड्योरेंस रिकॉर्ड’ बनाया था। उनके 5000 घंटे से अधिक के उड़ान अनुभव को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने 1994 में उन्हें ‘मानद एयर कमोडोर’ की उपाधि दी थी। बाद में वर्ष 2006 में उन्हें मुंबई का ‘शेरिफ’ भी नियुक्त किया गया।