केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इसके तहत वर्ष 2026 तक चार सेमीकंडक्टर प्लांट तैयार हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद वर्ष 2027 तक दो और प्लांट का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट 2028 तक गुजरात के धोलेरा में तैयार हो जाएगी।
यह बयान उस समय आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में केयन्स सेमीकॉन की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा का उद्घाटन किया। इस संदर्भ में वैष्णव ने कहा कि साणंद स्थित यह यूनिट देश का दूसरा सेमीकंडक्टर प्लांट है और यह भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की दिशा में एक अहम उपलब्धि है।
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि देश के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन 28 फरवरी को माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा किया गया था। इसके बाद 31 मार्च को दूसरे प्लांट के रूप में साणंद की यूनिट शुरू हुई। उन्होंने आगे कहा कि तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन जुलाई में किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में विकास की गति और तेज होगी।
साणंद में स्थापित केयन्स सेमीकॉन की यूनिट की प्रगति को रेखांकित करते हुए वैष्णव ने बताया कि इसने केवल 14 महीनों के भीतर नींव रखने से लेकर औद्योगिक उत्पादन शुरू करने तक का सफर पूरा किया है। उन्होंने इसे भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का उदाहरण बताया और कहा कि इसने देशभर के इंजीनियरों और छात्रों को प्रेरित किया है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को गुणवत्ता और लागत दोनों के मामले में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। उन्होंने कहा कि तभी देश वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रख सकेगा और आगे बढ़ा सकेगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर काम कर रही है, जिसमें मशीनरी, रसायन, गैस और परीक्षण अवसंरचना शामिल हैं।
अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया कि देश में कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 60,000 युवा इंजीनियरों को सिनॉप्सिस और कैडेंस जैसे उन्नत वैश्विक डिजाइन टूल्स में प्रशिक्षित किया गया है। ये इंजीनियर देश के 315 विश्वविद्यालयों से आए हैं और वर्तमान में चिप डिजाइन के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इन युवा इंजीनियरों द्वारा डिजाइन की गई चिप्स का निर्माण चंडीगढ़ स्थित एक प्रयोगशाला में किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि एनवीडिया, एएमडी और इंटेल जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में उन्नत चिप डिजाइन पर काम कर रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत में 2 नैनोमीटर जैसी अत्यंत जटिल चिप्स का डिजाइन भी किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य केवल डिजाइन तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण क्षमता को भी मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि सरकार ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ के तहत पूरे इकोसिस्टम को देश के भीतर विकसित करने पर जोर दे रही है। इसमें मशीनों, गैसों और रसायनों की उपलब्धता को भी भारत में सुनिश्चित करने की योजना शामिल है।
अंत में उन्होंने भारत के दीर्घकालिक लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य वर्ष 2032 तक देश को दुनिया के शीर्ष छह सेमीकंडक्टर देशों में शामिल करना है। इसके बाद 2047 तक भारत को इस क्षेत्र में शीर्ष तीन देशों में स्थान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।