देश के उत्तरी हिस्सों में जहां आमतौर पर अप्रैल के पहले सप्ताह में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है और कई राज्यों में लू चलने लगती है, वहीं इस बार मौसम का रुख पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। दक्षिणी और तटीय क्षेत्रों में जहां उमस भरा मौसम रहता है, वहां भी इस बार बारिश हो रही है। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी हो रही है, मैदानी इलाकों में ओले गिर रहे हैं और तापमान भी 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे कम बना हुआ है।
इस असामान्य मौसम के पीछे मुख्य वजह लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च और अप्रैल के दौरान आमतौर पर इतने अधिक पश्चिमी विक्षोभ नहीं बनते, लेकिन इस बार इनकी संख्या ज्यादा है। इनका प्रभाव खासतौर पर उत्तर भारत में देखने को मिल रहा है। वर्तमान में इन विक्षोभों की स्थिति उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में बनी हुई है, जिन्हें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भरपूर नमी मिल रही है, जिससे तेज आंधी और बारिश की स्थिति बनी है।
आंकड़ों के अनुसार, केवल मार्च महीने में ही 8 पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे, जबकि सामान्य स्थिति में यह संख्या 5 से 6 के बीच होती है। 13 मार्च से अब तक 6 विक्षोभ आ चुके हैं और 6 अप्रैल को एक नया सिस्टम बनने की संभावना है, जिसका असर अभी से दिखने लगा है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि झारखंड में ओले और बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी, पौड़ी, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जिलों में दोपहर बाद बारिश हो रही है। केदारघाटी में भी वर्षा दर्ज की गई है। वहीं नैनीताल, अल्मोड़ा, चमोली, देहरादून और पिथौरागढ़ में घने बादल छाए हुए हैं। 3300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
रविवार को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और पूर्वोत्तर राज्यों—नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम से जुड़े प्रमुख सवालों के जवाब भी सामने आए हैं। ओलावृष्टि का कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से एक साथ आई नमी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है। पंजाब और छत्तीसगढ़ के आसपास बने चक्रवाती सिस्टम ने भी इसमें भूमिका निभाई। दोपहर बाद आंधी और बारिश इसलिए होती है क्योंकि दिन में बढ़ता तापमान सिस्टम को ऊर्जा देता है, जिससे शाम के समय मौसम बिगड़ता है। वहीं, 15 अप्रैल के बाद मौसम के स्थिर होने और गर्मी के धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है, हालांकि गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में लू का असर सीमित रहने की उम्मीद है।
राज्यों से मिली जानकारी के अनुसार, राजस्थान में 13 जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। उदयपुर में 32 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों को नुकसान हुआ है। मध्य प्रदेश में बैतूल, श्योपुर और मुरैना सहित कई जिलों में ओले गिरे, जिससे सड़कों पर बर्फ जैसी स्थिति बन गई। ग्वालियर सहित 27 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश में तेज आंधी और बारिश के कारण कानपुर में 200 से अधिक पेड़ और बिजली के पोल गिर गए, जबकि बीते 48 घंटों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी है। उत्तराखंड में केदारनाथ और पिथौरागढ़ में बर्फबारी हुई है, जबकि अन्य पहाड़ी जिलों में भी बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।