सोमवार, 13 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 703 अंक यानी 0.91% टूटकर 76,848 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 208 अंक यानी 0.86% गिरकर 23,843 पर आ गया। पूरे दिन के कारोबार में लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।
हालांकि, सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे कम गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला, जहां निवेशकों ने जमकर बिकवाली की।
बाजार में इस गिरावट की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव रहा। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में करीब 21 घंटे तक चली लंबी वार्ता किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि वे बिना किसी समझौते के लौट रहे हैं। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है।
इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के साथ वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की तैयारी की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। आज इसमें 7% से अधिक की तेजी आई और यह 102 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया।
घरेलू बाजार पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर पड़ा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अप्रैल महीने में अब तक 48,213 करोड़ रुपए के शेयरों की बिकवाली की है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने 672 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की थी।
दूसरी ओर, भारतीय रुपए पर भी दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया आने वाले समय में 93.50 से 94 के स्तर तक कमजोर हो सकता है।