देश में महंगाई के मोर्चे पर ताजा आंकड़े सामने आए हैं। मार्च महीने में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 3.4% हो गई है, जबकि फरवरी में यह 3.21% थी। ये आंकड़े 13 अप्रैल को जारी किए गए।
महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव का माहौल है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। यदि यह संघर्ष लंबा चलता है, तो महंगाई पर आगे और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में तेजी है। फूड इन्फ्लेशन मार्च में बढ़कर 3.71% हो गया, जो फरवरी में 3.47% था। यानी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण इलाकों में महंगाई अधिक तेजी से बढ़ी है। ग्रामीण महंगाई फरवरी के 3.37% से बढ़कर मार्च में 3.63% हो गई, जबकि शहरी महंगाई 3.02% से बढ़कर 3.11% दर्ज की गई।
यह आंकड़े नए बेस ईयर 2024 के तहत जारी किए गए हैं और यह इस नए फॉर्मूले के तहत तीसरी रिपोर्ट है। सरकार ने महंगाई मापने के तरीके में बदलाव करते हुए उपभोक्ता बास्केट में भी संशोधन किया है।
नए बदलावों के तहत खाने-पीने की चीजों का वेटेज 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है। वहीं, हाउसिंग और बिजली-गैस जैसे खर्चों का वेटेज बढ़ाया गया है।
इसके अलावा, पुराने हो चुके उत्पाद जैसे वीसीआर और ऑडियो कैसेट को बास्केट से हटा दिया गया है, जबकि आधुनिक खर्चों जैसे OTT सब्सक्रिप्शन और डिजिटल स्टोरेज को इसमें शामिल किया गया है।