महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विकसित भारत’ की एक नई और व्यापक परिभाषा प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का विकास केवल रेल, सड़क और आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करता है।
सबका साथ-सबका विकास और नारी शक्ति: प्रधानमंत्री ने अपने मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास’ को दोहराते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना यह लक्ष्य अधूरा है। उन्होंने विरोधियों को याद दिलाया कि अतीत में जब भी महिला आरक्षण की राह में बाधाएं उत्पन्न की गईं, तब महिलाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से उसका करारा जवाब दिया है।
वैश्विक भारत का नया आत्मविश्वास: पीएम ने रेखांकित किया कि 21वीं सदी का भारत आज एक नए आत्मविश्वास के साथ वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने सदन को आगाह किया कि इस विधेयक पर होने वाली चर्चा और उसके निष्कर्ष देश की राजनीति की भविष्य की दिशा और दशा तय करेंगे। यह समय श्रेय लेने का नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का है।